छत्तीसगढ़

लखपति दीदी बनीं चित्र रेखा धुरी : संघर्ष से आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी l

लखपति दीदी बनीं चित्र रेखा धुरी : संघर्ष से आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी l

बिलासपुर l जनपद पंचायत बिल्हा के भैंसबोड क्लस्टर के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत नगपुरा की संस्कार समूह से जुड़ी बिहान दीदी चित्ररेखा धुरी ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों और सरकारी योजनाओं के सहयोग से हर सपना साकार किया जा सकता है। सीमित संसाधनों के बीच जीवनयापन कर रहीं चित्र रेखा ने स्व सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की राह चुनी और आज वे “लखपति दीदी” के रूप में पहचानी जा रही हैं, चित्रेखा ने आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए सरकारी योजनाओं को बड़ा संबल बताया उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का जन हितैषी योजनाओं के लिए आभार जताया है, जिससे हर वर्ग लाभान्वित हो रहा है।
समूह में जुड़ने से पूर्व बिहान दीदी चित्रेखा धुरी के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद सामान्य थी। घरेलू जिम्मेदारियों के साथ परिवार के लिए आय के सीमित साधन होने के कारण अक्सर चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। ऐसे समय में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की बिहान योजना के तहत संस्कार समूह ने उन्हें न केवल आर्थिक सहयोग दिया, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ाया। समूह से ऋण प्राप्त कर उन्होंने ई-रिक्शा खरीदा और संचालन की जिम्मेदारी अपने पति को दी। यह कदम उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव लेकर आया। ई-रिक्शा संचालन से नियमित आय होने लगी तो उन्होंने सिलाई कार्य भी शुरू किया। गांव की महिलाओं और बच्चों के कपड़े सिलकर अतिरिक्त आमदनी अर्जित करने लगीं। इसके साथ ही घर के पास सब्जी बाड़ी तैयार कर मौसमी सब्जियों का उत्पादन भी शुरू किया, जिससे परिवार की जरूरतें पूरी होने के साथ बाजार में बिक्री से लाभ भी मिलने लगा। तीनों कार्यों से आय के स्रोत मजबूत हुए और धीरे-धीरे उनकी वार्षिक आय लाख रुपये से अधिक हो गई। आज चित्र रेखा धुरी आर्थिक रूप से सशक्त हैं और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं।
चित्ररेखा की सफलता ने गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया है कि वे स्व सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। वे खुश होकर बताती हैं कि उन्हें महतारी वंदन योजना का भी मिलता है जिससे उन्हें अपनी छोटी छोटी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है वे कहती है कि मुख्यमंत्री जी की संवेदनशील पहल का ही परिणाम है कि महिलाओं के हाथ में उनका अपना पैसा है और शासन की अनेक कल्याणकारी योजनाओं से जुड़कर उन जैसी अनेक महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनने की दिशा में अग्रसर हो रही हैं।

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