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कूनो के 4 चीते से गुजरात के कच्छ में बसाएंगे आशियाना, नौरादेही को करना पड़ेगा इंतजार

भोपाल :भारत में चीता पुनर्वास परियोजना सफलता के नए पायदान पर है. मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से 4 चीतों को गुजरात के कच्छ स्थित बन्नी ग्रासलैंड में भेजने का फैसला लिया गया है. यह कदम न केवल चीतों के संरक्षण की दिशा में साहसी प्रयोग है, बल्कि यह देश में चीता प्रोजेक्ट के विस्तार का एक नया मॉडल भी पेश करता है. अब तक जो चीते केवल मध्य प्रदेश के जंगलों तक सीमित थे, वे जल्द ही एक नए राज्य की आबोहवा में अपनी धाक जमाएंगे. पहले इन चीतों को नौरादेही में शिफ्ट किया जाना था.

​क्यों खास है कच्छ का बन्नी ग्रासलैंड

वन विशेषज्ञ सुदेश बाघमारे के अनुसार “गुजरात का बन्नी ग्रासलैंड चीतों के प्राकृतिक आवास के लिए बेहद उपयुक्त है. इसकी भौगोलिक परिस्थितियां अफ्रीका के सवाना घास के मैदानों से काफी मिलती-जुलती हैं, जो चीतों की शिकार करने और तेजी से दौड़ने की प्रवृत्ति के लिए एकदम अनुकूल वातावरण प्रदान करती हैं. यहां चीतों के लिए 600 हेक्टेयर के एक विशेष क्षेत्र में फेंसिंग, साफ्ट रिलीज एनक्लोजर और क्वारंटाइन जोन जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं तैयार की जा रही हैं.”

​अंतरराज्यीय शिफ्टिंग की चुनौतियां और उम्मीदें

सुदेश बाघमारे के अनुसार “यह पहली बार होगा जब भारत में चीतों की अंतरराज्यीय शिफ्टिंग की जाएगी. कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीकी चीतों के सफल अनुकूलन के बाद, अब इन्हें नए भौगोलिक क्षेत्रों में बसाना एक बड़ी चुनौती है. हालांकि वन विभाग और एनटीसीए की टीम ने शिकार की उपलब्धता और सुरक्षा व्यवस्था का पूरा आकलन कर लिया है. विशेषज्ञों की निगरानी में अगस्त-सितंबर तक इस प्रक्रिया को शुरू करने की योजना है.”

चीता प्रोजेक्ट में ​दूरगामी लक्ष्यों की ओर बढ़ते कदम

​इस कदम का मुख्य उद्देश्य चीता प्रोजेक्ट को केवल एक या दो राज्यों तक सीमित न रखकर इसे पूरे देश में फैलाना है. मध्य प्रदेश के पास अभी कुल 53 चीते हैं, जिनमें से 50 कूनो में और 3 गांधीसागर में रह रहे हैं. बन्नी ग्रासलैंड में चीतों का आना लगभग 8 दशक बाद गुजरात में उनकी वापसी का प्रतीक होगा, क्योंकि 1940 के दशक तक यहा चीते पाए जाते थे. यह शिफ्टिंग न केवल चीतों की आबादी को सुरक्षित करेगी, बल्कि भारत के वन्यजीव मानचित्र पर नए गौरवशाली इतिहास भी जोड़ेगी.

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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