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रचनाकार ने कविता के माध्यम से कोरोना संक्रमण, पड़ोसी देशों का बर्ताव व समसामयिक जीवन शैली का वर्णन किया है। मधुकर की कलम से..

रचनाकार ने कविता के माध्यम से कोरोना संक्रमण, पड़ोसी देशों का बर्ताव व समसामयिक जीवन शैली का वर्णन किया है। मधुकर की कलम से..

कविता
“इतनी नींद क्यों आती है मुझे”

इतनी नींद क्यों आती है मुझे
गोधूलि बेला से लेकर प्रभात
तक
अलार्म बजता है,
यह सिलसिला चलता है।
कानों में अपुष्ट नाद अनवरत
जैसे घोड़ा बेचा हो,
राह में मुनाफा हुआ हो,
अविराम सोए चला जाता हूं मैं
न किसी की याद में
न किसी की चाह में
न कामयाबी की तमन्ना
ना वैभव की लालसा
नींद से जगूं तो सामने
आताताई,
रवि की तेज किरणें
कोरोना का हुंकार,
युद्ध का शंखनाद,
मानव विप्लव से घिरा हुआ
यह सिलसिला अनवरत
इतनी नींद क्यों आती है मुझे
गोधूलि बेला से लेकर प्रभात तक।

के पी मधुकर
एम.ए. हिंदी, एम लिब.

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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