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गयाजी के एक परिवार की तीन सफलताएं: एक बेटी NSE में मैनेजर, बेटा बना पायलट, दूसरी बेटी बनी उद्यमी

गयाजी। गया जिले का एक साधारण परिवार आज अपनी असाधारण उपलब्धियों के कारण चर्चा में है। अतरी प्रखंड के बेला गांव से निकले इस परिवार के तीन बच्चों ने अलग-अलग क्षेत्रों में सफलता हासिल कर न सिर्फ अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे जिले के लिए प्रेरणा बन गए हैं। एक ही घर से निकली ये तीन कहानियां अब सफलता की मिसाल बन चुकी हैं।।

एक ही परिवार से तीन बड़ी उपलब्धियां, बना प्रेरणा का केंद्र

इस परिवार की बेटी रितिका राठौर ने देश की प्रतिष्ठित संस्था नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में मैनेजर पद हासिल किया है। वहीं बेटे रितांशु रंजन का चयन इंडिगो के कैडेट पायलट प्रोग्राम में हुआ है। परिवार की बड़ी बेटी रूपाली राठौर भी सफल उद्यमी बनकर अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।

पिता की मेहनत और अनुशासन से मिली उड़ान

इन तीनों बच्चों की सफलता के पीछे उनके पिता रवि रंजन कुमार सिंह की अहम भूमिका रही है। विमानन क्षेत्र से जुड़े होने के कारण उन्होंने बच्चों को अनुशासन, समय प्रबंधन और लक्ष्य के प्रति समर्पण सिखाया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को प्राथमिकता दी और बच्चों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराए।

रितिका की सफलता: कानून से कॉर्पोरेट तक का सफर

रितिका राठौर ने गया से पढ़ाई के बाद सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से बीबीएम-एलएलबी और फिर महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से एलएलएम किया। उन्होंने एक मल्टीनेशनल कंपनी में लीगल एडवाइजर के रूप में काम किया, लेकिन बाद में अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए एनएसई में मैनेजर पद स्वीकार किया।

रितांशु का सपना साकार, पायलट बनने की राह पर

रितांशु रंजन ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कड़ी मेहनत से इंडिगो के कैडेट पायलट प्रोग्राम में जगह बनाई। कई चरणों की कठिन चयन प्रक्रिया को पार करते हुए उन्होंने यह सफलता हासिल की। उनका प्रशिक्षण 6 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुका है, जिससे उनका सपना अब हकीकत बन रहा है।

बड़ी बेटी रूपाली बनीं सफल उद्यमी

परिवार की बड़ी बेटी रूपाली राठौर ने भी उद्यमिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने अपना स्टार्टअप शुरू कर न सिर्फ खुद को स्थापित किया, बल्कि कई लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराया है। उनकी सफलता इस परिवार की तीसरी बड़ी उपलब्धि है।

गांव में जश्न, युवाओं के लिए प्रेरणा बना परिवार

इस परिवार की सफलता के बाद बेला गांव और एपी कॉलोनी में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोग इसे एक प्रेरणादायक उदाहरण मान रहे हैं। यह कहानी साबित करती है कि अगर सही मार्गदर्शन, अनुशासन और मेहनत हो, तो छोटे गांव से भी बड़े सपनों को हासिल किया जा सकता है

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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