बिहार के सभी सरकारी कर्मचारियों को लेना ही होगा ‘कंपल्सरी हॉलीडे’, सपरिवार घूमना जरूरी

बिहार में टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने एक फरमान निकाला है. इसमें कहा गया है कि सभी सरकारी अधिकारी, कर्मचारी हर तीन महीने में एक बार अपने परिवार संग राज्य की तीन जगहों पर घूमने जाएंगे. और उन्होंने वहां क्या देखा, उनका क्या एक्सपीरियंस रहा, सब बताएंगे.
बिहार में सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों को घूमने का आदेश
इंडिया टुडे से जुड़े शशि भूषण की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपल्सरी हॉलीडे (अनिवार्य छुट्टी) के तहत निर्देश दिया गया है कि एंप्लॉयी को अपनी हर यात्रा के दौरान कम से कम तीन पर्यटन स्थलों का दौरा करना होगा. उस इलाके में रात बितानी होगी. जब यात्रा पूरी हो जाएगी, तब उन्हें जिलाधिकारियों को एक रिपोर्ट सौंपनी होगी.रिपोर्ट में देखे गए स्थलों की तस्वीरें, उन जगहों से जुड़ी जानकारी और दौरे के दौरान उनके पर्सनल एक्सपीरियंस को शामिल करना होगा. ये रिपोर्टें अधिकारी की तैनाती के स्थान के आधार पर, जिलाधिकारियों, मंडलीय आयुक्तों या संबंधित विभागों को सौंपी जाएंगी,
घूमने को माना जाएगा सरकारी ‘ड्यूटी’
सरकार ने कहा है कि यात्रा और वहां (पर्यटक स्थल) पर रुकने की अवधि को ‘सरकारी ड्यूटी’ माना जाएगा. सरकार ने अधिकारियों को ये भी निर्देश दिया है कि वे इन यात्राओं को किसी भी तरह की आधिकारिक समीक्षा बैठकों या साइट निरीक्षणों के साथ न जोड़ें.
सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, डॉ. बी. राजेंद्र द्वारा जारी यह निर्देश बिहार के सभी अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, सचिवों, मंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और वन विभाग के अधिकारियों को भेजा गया है. सभी वरिष्ठ अधिकारियों को भी अपने जिले से बाहर जाकर पर्यटन स्थल पर जाना होगा.हॉलीडे का उद्देश्य क्या?
, , जो ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पारिस्थितिक विविधता के बावजूद अभी तक ज्यादा पहचान नहीं बना पाई हैं. ऐसे में सरकार ने इन क्षेत्रों में पर्यटन से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के तरीके खोजने के लिए कदम उठाया है.




