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सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने छोड़ी लाखों पैकेज वाली नौकरी, 2 गाय और 3 मुर्गियों से शुरू किया सफल कारोबार

कोरबा. छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के गौरव यादव ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादा मजबूत हो और योजना सही हो, तो छोटे स्तर से शुरू किया गया काम भी बड़ी सफलता में बदल सकता है. कभी हैदराबाद में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में करीब 70 हजार रुपये महीना वेतन पाने वाले गौरव यादव ने अपने करियर के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर साहसिक फैसला लिया और नौकरी छोड़कर अपने गृह नगर कोरबा लौट आए. गौरव का मानना था कि गांव और छोटे शहरों में भी सही योजना और मेहनत के साथ अच्छी आय के अवसर मौजूद हैं. इसी सोच के साथ उन्होंने अपने घर के छोटे से आंगन में मात्र दो गाय और तीन देसी मुर्गियों के साथ डेयरी और पोल्ट्री व्यवसाय की शुरुआत की. शुरुआत में वह खुद ही पशुओं की देखभाल करते थे. सुबह-सुबह चारा तैयार करना, मुर्गियों के दड़बे की सफाई करना और दूध की आपूर्ति की व्यवस्था करना उनके रोजमर्रा के काम का हिस्सा बन गया. धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी. लगभग एक साल के भीतर उन्होंने अपने छोटे से व्यवसाय का विस्तार कर लिया. आज उनके फार्म में करीब 30 गायें और लगभग 500 देसी मुर्गियां हैं. इस तरह उनका छोटा प्रयास अब एक मध्यम स्तर के उद्यम में बदल चुका है.

देसी मुर्गियों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्हें बड़े-बड़े पिंजरों या महंगे फीड की जरूरत नहीं होती. गौरव लोकल 18 को बताते हैं कि मुर्गियों से रोज लगभग 20 से 25 अंडे प्राप्त होते हैं और समय-समय पर कुछ मुर्गियों की बिक्री भी होती रहती है. इससे उन्हें हर महीने लगभग 20 हजार से 25 हजार रुपये तक की आय हो जाती है. वहीं डेयरी व्यवसाय में भी उन्हें अच्छी सफलता मिल रही है. दो गायों से शुरू हुआ दूध का कारोबार अब 30 गायों तक पहुंच चुका है. दूध उत्पादन और बिक्री के साथ-साथ उन्होंने फीड और श्रम लागत को नियंत्रित रखने की रणनीति अपनाई है. इस मॉडल के जरिए उन्हें हर महीने लगभग 90 हजार रुपये तक की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है.

स्थानीय अनाज और चारे का उपयोग
उन्होंने शहर में देसी अंडे और ताजे दूध की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए अपना व्यवसाय विकसित किया. साथ ही महंगे औद्योगिक फीड की बजाय स्थानीय अनाज और चारे का उपयोग किया और परिवार के सदस्यों को भी काम में शामिल किया. गौरव अपने फार्म में जल्द ही एक छोटी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करना चाहते हैं, जहां दूध से पनीर और दही जैसे उत्पाद बनाए जा सकें और अंडों की पैकेजिंग को भी बेहतर बनाया जा सके. उनका लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों में उनके फार्म में 100 गायें और 1000 मुर्गियां हों और आय को दोगुना किया जा सके.आर्थिक स्थिति को नई दिशा
गौरव यादव की यह कहानी दिखाती है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया प्रयास भी यदि समर्पण और सही रणनीति के साथ किया जाए, तो वह न केवल व्यक्तिगत सफलता दिला सकता है बल्कि आर्थिक स्थिति को भी नई दिशा दे सकता है.

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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