छत्तीसगढ़

बच्चे को डराने की नहीं, जागरूक और विश्वासपूर्ण बनाने की जरूरत

*POCSO से बचाव — बच्चों की सुरक्षा में परिवार और कानून की भूमिका*

*बच्चों को POCSO से बचाने के लिए घर में शुरू करें सुरक्षा की पहली पाठशाला’*

बच्चे को डराने की नहीं, जागरूक और विश्वासपूर्ण बनाने की जरूरत

“गलत हुआ तो बताओ, तुम्हारी गलती नहीं है”

*विशेष कानूनी जन-जागरूकता लेख*

*अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी*

*मोबाइल : 9893354327*

 

*बच्चे को सुरक्षित रखने की पहली जिम्मेदारी केवल कानून की किताबों में नहीं, बल्कि घर की बातचीत से शुरू होती है। बच्चों के विरुद्ध यौन अपराध एक गंभीर सामाजिक और कानूनी चुनौती हैं। ऐसे अपराधों से बच्चों को संरक्षण देने के लिए बालकों का लैंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act) लागू है।*

लेकिन अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी के अनुसार, केवल कठोर कानून बना देना पर्याप्त नहीं है। माता-पिता, शिक्षक और समाज को भी बच्चों को उनकी उम्र और समझ के अनुरूप व्यक्तिगत सुरक्षा, अनुचित व्यवहार की पहचान तथा सहायता मांगने के अधिकार के बारे में जागरूक करना होगा।

कॉलम–1 | *सुरक्षा की पहली पाठशाला*

“मेरा शरीर, मेरी सुरक्षा”

अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी कहते हैं कि बच्चों को डराकर नहीं, बल्कि विश्वास और जागरूकता के साथ सुरक्षित वातावरण देना चाहिए।

माता-पिता बच्चे की उम्र और समझ के अनुसार उसे यह समझाएं कि उसके शरीर की निजता महत्वपूर्ण है। यदि कोई व्यवहार उसे असहज, भयभीत या परेशान करता है तो वह “नहीं” कह सकता है, वहां से हट सकता है और किसी विश्वसनीय वयस्क को बता सकता है।

बच्चे को यह विश्वास होना चाहिए कि—

“कोई भी व्यक्ति कितना भी परिचित क्यों न हो, यदि उसका व्यवहार गलत या असहज लगे तो तुम हमें बता सकते हो।”

केवल अजनबी से सावधान करना पर्याप्त नहीं

अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी के अनुसार बच्चों को केवल यह बताना कि “अजनबी से बात मत करो” पर्याप्त सुरक्षा शिक्षा नहीं है। बच्चे के परिचित व्यक्ति का अनुचित व्यवहार भी गंभीर हो सकता है।

इसलिए बच्चों को व्यक्ति की पहचान से ज्यादा व्यवहार और परिस्थिति को पहचानना सिखाना जरूरी है।

“गुप्त बात” के नाम पर डराया जाए तो

यदि कोई व्यक्ति बच्चे को किसी ऐसी बात को छिपाने के लिए कहता है जिससे बच्चा डरता या परेशान होता है, तो उसे स्पष्ट रूप से बताया जाए कि वह बात माता-पिता या किसी विश्वसनीय व्यक्ति को बता सकता है।

धमकी, लालच या भावनात्मक दबाव बच्चे को चुप रहने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।

बच्चा बताए तो पहले सुनें

अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी बताते हैं कि ऐसी स्थिति में माता-पिता की पहली प्रतिक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है।

बच्चे से कहें—

“तुमने हमें बताकर सही किया।”

“हम तुम्हारे साथ हैं।”

“जो हुआ उसके लिए तुम्हें दोषी नहीं माना जाएगा।”

बच्चे को दोष देना, शर्मिंदा करना या अनावश्यक रूप से बार-बार पूछताछ करना उचित नहीं है।

कॉलम–2 | *POCSO कानून को समझें*

18 वर्ष से कम आयु का व्यक्ति ‘बालक’

POCSO अधिनियम की धारा 2(द) के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु का व्यक्ति “बालक” है।

अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी के अनुसार माता-पिता को यह समझना चाहिए कि POCSO में अपराध की कानूनी प्रकृति घटना के वास्तविक तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

इस अधिनियम में लैंगिक हमला, गंभीर लैंगिक हमला, लैंगिक उत्पीड़न तथा बालक को अश्लील उद्देश्यों के लिए उपयोग करने से संबंधित अपराधों के लिए विशेष प्रावधान हैं।

सूचना मिलने पर क्या करें?

POCSO की धारा 19 के तहत अपराध की जानकारी या आशंका होने पर निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार पुलिस अथवा विशेष किशोर पुलिस इकाई को सूचना दी जा सकती है। कानून में कुछ परिस्थितियों में सूचना न देने के संबंध में दंडात्मक प्रावधान भी हैं।

इसलिए किसी गंभीर घटना को केवल सामाजिक दबाव या बदनामी के डर से छिपाने के बजाय समय पर उचित कानूनी सलाह और कार्रवाई लेना महत्वपूर्ण है।

बच्चे की पहचान सार्वजनिक न करें

POCSO की धारा 23 बच्चे की पहचान तथा उससे संबंधित जानकारी के प्रकाशन पर महत्वपूर्ण प्रतिबंध लगाती है।

*अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी विशेष रूप से अभिभावकों से अपील करते हैं कि* POCSO मामले में बच्चे का—

नाम,

फोटो,

पता,

विद्यालय,

परिवार की पहचान,

या पहचान उजागर करने वाली अन्य जानकारी

सोशल मीडिया अथवा सार्वजनिक मंच पर साझा न करें।

बच्चे की गरिमा और निजता की रक्षा प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

कॉलम–3 | *मोबाइल, इंटरनेट और सामाजिक जिम्मेदारी*

डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा

आज बच्चों का एक बड़ा हिस्सा इंटरनेट और ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ा है। सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से होने वाले संपर्क में भी सावधानी आवश्यक है।

अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी के अनुसार माता-पिता बच्चों को समझाएं—

निजी फोटो या वीडियो किसी के साथ साझा न करें।

ऑनलाइन किसी व्यक्ति के दबाव में व्यक्तिगत जानकारी न दें।

ऑनलाइन मिले व्यक्ति से अकेले मिलने न जाएं।

धमकी या ब्लैकमेल की स्थिति में तुरंत अभिभावक को बताएं।

आपत्तिजनक सामग्री को आगे प्रसारित न करें।

यदि कोई डिजिटल सामग्री किसी अपराध से संबंधित हो सकती है, तो उसे घबराहट में नष्ट या प्रसारित करने के बजाय उचित कानूनी प्रक्रिया के संबंध में सलाह लेना उचित है।

🔴 विशेष बॉक्स

*POCSO में माता-पिता क्या करें / क्या न करें*

✅ *क्या करें*

✔ बच्चे की बात शांतिपूर्वक सुनें।

✔ बच्चे को दोषी न ठहराएं।

✔ उसकी तत्काल सुरक्षा को प्राथमिकता दें।

✔ आवश्यक होने पर पुलिस/विशेष किशोर पुलिस इकाई से संपर्क करें।

✔ आवश्यकता के अनुसार चिकित्सकीय एवं मनोवैज्ञानिक सहायता लें।

✔ बच्चे की पहचान और निजता की रक्षा करें।

✔ उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए उचित कानूनी सलाह लें।

✔ बच्चे को न्यायिक प्रक्रिया के दौरान भावनात्मक सहयोग दें।

❌ *क्या न करें*

✘ बच्चे को घटना के लिए जिम्मेदार न ठहराएं।

✘ उसे धमकाकर या दबाव डालकर चुप न कराएं।

✘ सामाजिक बदनामी के कारण घटना छिपाने का प्रयास न करें।

✘ बच्चे की पहचान सोशल मीडिया पर सार्वजनिक न करें।

✘ फोटो/वीडियो को व्हाट्सऐप या अन्य माध्यमों से प्रसारित न करें।

✘ आरोपी से हिंसक टकराव के बजाय कानून के अनुसार कार्रवाई करें।

✘ बच्चे से अनावश्यक और बार-बार पूछताछ न करें।

⭐ *अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी की अपील*

हर माता-पिता बच्चे को ये पाँच बातें जरूर बताएं

1. तुम्हारा शरीर और तुम्हारी सुरक्षा महत्वपूर्ण है।

2. कोई व्यवहार असहज लगे तो “नहीं” कह सकते हो।

3. डराने वाली या परेशान करने वाली बात छिपाना जरूरी नहीं है।

4. परेशानी होने पर तुरंत माता-पिता या किसी भरोसेमंद वयस्क को बताओ।

5. तुम्हारे साथ अपराध होने पर तुम्हें दोषी नहीं माना जाना चाहिए।

बच्चे की चुप्पी नहीं, उसका विश्वास बचाएं

अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी कहते हैं कि बाल सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार विश्वास है। यदि बच्चे को भरोसा हो कि उसके माता-पिता उसकी बात सुनेंगे, उसे दोष नहीं देंगे और उसकी सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाएंगे, तो वह कठिन परिस्थिति में समय रहते सहायता मांग सकता है।

बाल सुरक्षा की शुरुआत थाने या अदालत से पहले घर से होती है।

हर माता-पिता अपने बच्चे से यह जरूर कहें—

“तुम्हारे साथ कभी कोई गलत व्यवहार हो, चाहे वह कोई भी व्यक्ति करे, तुम बिना डरे हमें बता सकते हो। हम तुम्हारी बात सुनेंगे, तुम्हें दोष नहीं देंगे और तुम्हारी सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाएंगे।”

यही विश्वास बच्चे के लिए सबसे मजबूत सुरक्षा कवच बन सकता है।

✍️ *अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी*

मोबाइल : 9893354327

*कानूनी जागरूकता एवं जनहित लेख*

*विषय : बाल सुरक्षा एवं POCSO अधिनियम*

यह लेख सामान्य कानूनी जन-जागरूकता के उद्देश्य से है।

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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