स्वास्थ्य/ शिक्षा

भूल जाइए धनिया और पुदीना, खाइए छत्तीसगढ़ की ये चापड़ा चटनी; सेहत का खजाना और बेमिसाल स्वाद

अगर आप छत्तीसगढ़, खासकर बस्तर के आदिवासी अंचलों की सैर पर निकलें, तो यहां का प्राकृतिक सौंदर्य और संस्कृति आपका मन मोह लेगी. बस्तर की पहचान सिर्फ इसके घने जंगलों और झरनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां का अनूठा खान-पान भी दुनिया भर के लोगों को हैरान करता है. इन्हीं में से एक बेहद खास और चटपटी डिश है ‘चापड़ा चटनी’. पहली बार सुनने में यह सिर्फ एक चटनी लग सकती है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लाल चींटियों और उनके अंडों से बनाई जाती है. लोग इस चटनी को बड़े चाव से खाते हैं.

बस्तर के जंगलों में पेड़ों की पत्तियों पर लाल चींटियां रहती हैं. आदिवासी समुदाय के लोग बड़े जोखिम के साथ पेड़ों पर चढ़कर इन चींटियों और उनके सफेद अंडों को इकट्ठा करते हैं. लाल चींटियों के तीखे डंक की परवाह किए बिना इन्हें जमा करना ही इस चटनी को बनाने का सबसे पहला और कठिन चरण है.

कैसे बनाई जाती है चापड़ा चटनी?
चापड़ा चटनी को पारंपरिक तरीके से सिलबट्टे या पत्थर पर पीसकर बनाया जाता है. जमा की गई चींटियों और अंडों को अच्छी तरह साफ करने के बाद इसमें अदरक, लहसुन, हरी-लाल मिर्च, हरा धनिया और नमक मिलाया जाता है. इसमें अलग से नीबू या अमचूर डालने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि चींटियों के शरीर में मौजूद फॉर्मिक एसिड इसे प्राकृतिक रूप से खट्टा और तीखा स्वाद देता है. यह चटनी दिखने में लाल-नारंगी रंग की, स्वाद में बेहद चटपटी और जायकेदार होती है.

सेहत का खजाना है चापड़ा चटनी
चींटियों के अंडों में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है, जो शरीर को ताकत देता है. इसी वजह से चापड़ा चटनी सिर्फ स्वाद का जरिया नहीं है, बल्कि बस्तर के आदिवासियों के लिए यह सेहत का खजाना भी है. बताया जाता है कि इस चटनी में औषधीय गुण भी होते हैं और आदिवासी लोग इसे अपनी थाली का एक अहम हिस्सा मानते हैं. यह चटनी बीमारियों से भी बचाती है.चापड़ा चटनी का स्वाद चटपटा और हल्का खट्टा होता है. इसी वजह से इसका स्वाद दूसरी चटनियों से बिल्कुल अलग होता है. महुआ की रोटी, बाजरे की रोटी या चावल के साथ परोसा जाता है. आज यह चटनी अपनी एक अलग पहचान बना चुकी है और विदेशी पर्यटक भी इसकी मांग करते हैं. छत्तीसगढ़ के बाजारों में ही यह आसानी से मिल जाती है

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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