बुज़ुर्ग आबादी वाले इस राज्य की कोशिश कि कोई बूढ़ा अकेला न रहे कितनी कामयाब

उनका एक बेटा पड़ोसी राज्य कर्नाटक में रहता है, दूसरा मध्य-पूर्व में. दोनों ही कुछ साल पहले बेहतर रोज़गार की तलाश में राज्य से बाहर चले गए थे. तब से उन्हें और उनकी पत्नी एमजे मार्था को अपनी ज़िम्मेदार ख़ुद ही उठानी पड़ती है.
ये फ़ोन कॉल्स सुकून देते हैं और उनमें अक्सर स्वास्थ्य और मौसम जैसी आम चीज़ों पर बात होती है. लेकिन जब घर पर मदद की ज़रूरत होती है, तो बेटे काम नहीं आते.
उन जैसी स्थिति अब केरल में आम होती जा रही है, जो भारत का सबसे तेज़ी से बूढ़ा होता राज्य है. यहाँ पलायन के कारण बड़ी संख्या में बुज़ुर्ग अकेले रह रहे हैं.पिछले महीने राज्य सरकार ने बुज़ुर्गों के कल्याण के लिए एक अलग विभाग बनाने की घोषणा की. अधिकारियों का कहना है कि यह भारत में अपनी तरह का पहला विभाग है, जो वृद्ध आबादी की चुनौतियों से निपटने के लिए बनाया गया है.
डॉमिनिक कहते हैं, “हम पूरी तरह पड़ोसियों पर निर्भर हैं.” उनका घर कभी बच्चों की चहचहाहट से भरा रहता था, लेकिन अब वह अक्सर वहां ख़ामोशी के बीच बैठे रहते हैं.
वह कहते हैं, “हमारे बच्चे बहुत कम आते हैं और आस-पास कोई रिश्तेदार भी नहीं है जो मदद कर सके. हालात दिन-ब-दिन मुश्किल होते जा रहे हैं.”
उनके पास बैठी मार्था कहती हैं कि बुढ़ापे में अकेलापन अब ज़्यादा आम हो गया है.
पीढ़ियों से भारत में बुज़ुर्ग अपने बच्चों के साथ रहते आए हैं और उन्हीं पर देखभाल के लिए निर्भर रहा करते थे. लेकिन रोज़गार और शिक्षा के लिए पलायन ने इस परंपरा को धीरे-धीरे कमज़ोर कर दिया है, ख़ासकर केरल में. लेकिन भारत के इस सबसे तेज़ी से बूढ़े होते राज्य में सरकार इसका हल ढूंढने की कोशिश कर रही है.
नए विभाग के प्रमुख डॉक्टर रतन केलकर कहते हैं कि विभाग की रणनीति ‘अपने घर में ही वृद्धावस्था बिताने’ पर केंद्रित है यानी बुज़ुर्गों को बाहर संस्थानों में भेजने के बजाय उनके घरों और समुदायों में ही रहने में मदद करना.
इसकी योजनाओं में सामुदायिक और घर-आधारित देखभाल का विस्तार करना और ‘सोशल प्रिस्क्राइबिंग’ शुरू करना शामिल है – यानी बुज़ुर्गों को सार्थक सामाजिक गतिविधियों से जोड़ना.
राज्य अब एक प्रमाणित देखभालकर्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने, पेशेवर देखभालकर्मियों की टीम बनाने और बुज़ुर्गों के लिए पार्क, डे-केयर केंद्र और फ़िटनेस सुविधाएं तैयार करने की योजना बना रहा है. वरिष्ठ नागरिकों का एक राज्यव्यापी सर्वेक्षण दीर्घकालिक ‘सिल्वर इकॉनमी’ रोडमैप को दिशा देगा.
डॉक्टर केलकर कहते हैं, “बुढ़ापा अब सिर्फ़ कल्याण का मुद्दा नहीं रह गया है. यह स्वास्थ्य सेवा, आवास, परिवहन, स्थानीय प्रशासन, तकनीक, रोज़गार, सुरक्षा, वित्तीय सेवाओं और सामुदायिक जीवन – सबको प्रभावित करता है.”
भारत के बड़े राज्यों में सबसे ज़्यादा बुज़ुर्ग केरल में हैं. भारतीय रिज़र्व बैंक की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2036 तक राज्य की 22.8% आबादी यानी कि हर चार में से लगभग एक व्यक्ति की उम्र 60 से अधिक होगी. इसके मुकाबले राष्ट्रीय औसत 14.9% रहेगा.
राज्य की वृद्ध आबादी सामाजिक प्रगति और पलायन दोनों को दर्शाती है.
बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, लंबी आयु और घटती जन्म दर ने इसे भारत के सबसे पुराने राज्यों में से एक बना दिया है. हालांकि पीढ़ियों से लोग काम के लिए अक्सर माता-पिता को पीछे छोड़कर मध्य-पूर्व, यूरोप और अन्य जगहों पर जाते रहे हैं,



