बच्चों से बातचीत कर पढ़ाई, भोजन और दैनिक सुविधाओं की ली जानकारी, व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के दिए निर्देश’

अबूझमाड़ के धुरबेड़ा बालक आश्रम पहुंचकर अधिकारी ने परखी व्यवस्थाएं’
’बच्चों से बातचीत कर पढ़ाई, भोजन और दैनिक सुविधाओं की ली जानकारी, व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के दिए निर्देश’
सितंबर 2026 // जिले के अंदरूनी एवं दुर्गम क्षेत्रों में संचालित आश्रम-छात्रावासों में बच्चों को मिल रही सुविधाओं की जमीनी स्थिति जानने के लिए कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देशानुसार जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। इसी कड़ी में जिला अंत्यावसायी अधिकारी ए.आर. बेलसारिया ने ओरछा विकासखंड के दुर्गम आंचल में बसे धुरबेड़ा स्थित बालक आश्रम का आकस्मिक निरीक्षण किया।
आश्रम पहुंचने पर उन्होंने परिसर का भ्रमण कर वहां बच्चों के रहने और अध्ययन के लिए की गई व्यवस्थाओं को देखा। उन्होंने भोजन व्यवस्था, साफ-सफाई, स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं तथा बच्चों की दिनचर्या से जुड़ी जानकारी भी ली। इस दौरान बच्चों के बीच पहुंचकर अधिकारी ने उनसे उनकी पढ़ाई और आश्रम में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में बातचीत की। बच्चों से उनकी जरूरतों और किसी तरह की परेशानी के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की गई। उन्हें स्थानीय सरपंच और अधीक्षक से भी चर्चा कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान आश्रम में बच्चों के लिए भोजन, आवास और अध्ययन से जुड़ी व्यवस्थाएं संतोषजनक मिलीं तथा जिन चीजों में सुधार की आवश्यकता थी उन चीजों को सुधार के निर्देश अधीक्षक को दिए। दुर्गम क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद बच्चों के लिए स्वच्छ वातावरण बनाए रखने तथा उनकी नियमित आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए की जा रही व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया गया।
जिला अंत्यावसायी अधिकारी ने आश्रम के कर्मचारियों को निर्देशित किया कि बच्चों की सुविधा और सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की कमी न आने दी जाए। उन्होंने स्वच्छता, भोजन की गुणवत्ता एवं अध्ययन के अनुकूल वातावरण पर विशेष ध्यान देने तथा बच्चों द्वारा बताई गई आवश्यकताओं का समय पर समाधान करने के निर्देश दिए।
उल्लेखनीय है कि कलेक्टर नम्रता जैन द्वारा जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में संचालित आश्रम एवं छात्रावासों की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। अधिकारी निर्धारित क्षेत्रों में पहुंचकर आश्रम-छात्रावासों का निरीक्षण कर रहे हैं और विद्यार्थियों से सीधे संवाद के माध्यम से सुविधाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी ले रहे हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य दूरस्थ अंचलों में अध्ययनरत बच्चों को सुरक्षित वातावरण के साथ बेहतर आवासीय, शैक्षणिक एवं मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना ळें




