छत्तीसगढ़

अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष ने ली विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक’

’जिले में मछली पालन, पशुपालन और कृषि के क्षेत्र में स्वरोजगार बढ़ाने के दिए निर्देश’

’श्रम विभाग की समीक्षा कर श्रमिक कार्ड बनाने की संख्या बढ़ाने पर दिया जोर’

’शासकीय योजनाओं का लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने अधिकारियों को दिए निर्देश’

 सितंबर 2026// छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री रूप सिंह मण्डावी एवं उपाध्यक्ष श्री एम.डी. ठाकुर ने बुधवार को नारायणपुर जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारियों की जिला पंचायत के सभा कक्ष में समीक्षा बैठक ली। उन्होंने बैठक में आयोग के पदाधिकारियों ने जिले में संचालित विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और विभागीय गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने तथा शासन की योजनाओं को प्रभावी ढंग से धरातल पर लागू करने पर जोर दिया।

          समीक्षा बैठक में क्रेडा, विद्युत विभाग, श्रम विभाग, खेल एवं युवा कल्याण, मत्स्य पालन, पशुपालन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, उद्यानिकी, खनिज, महिला एवं बाल विकास, राजस्व, परिवहन, शिक्षा तथा आदिवासी विकास विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों से विभागवार जानकारी ली गई। आयोग के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन द्वारा संचालित योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्र हितग्राहियों को मिले और योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

’हर घर तक विद्युत कनेक्शन पहुंचाने पर जोर’

          बैठक में विद्युत विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए। आयोग के अध्यक्ष श्री रूप सिंह मण्डावी ने कहा कि जिले के प्रत्येक पात्र परिवार तक विद्युत कनेक्शन पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली से जुड़ी समस्याओं का निराकरण समयबद्ध तरीके से करने तथा शासन की योजनाओं का लाभ ग्रामीण परिवारों को उपलब्ध कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए।

          इसी तरह क्रेडा विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में वैकल्पिक ऊर्जा से संबंधित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों को योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने तथा पात्र हितग्राहियों को इसका लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

’मछली पालन और पशुपालन से बढ़ेगा स्वरोजगार’

          आयोग ने जिले में स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए मछली पालन, पशुपालन और कृषि आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। मछली पालन विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि अधिक से अधिक कृषकों और ग्रामीणों को मछली पालन की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाए। लोगों को मछली पालन के फायदे, विभागीय योजनाओं और उपलब्ध सहायता की जानकारी देकर इस व्यवसाय को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए।

          अधिकारियों से कहा गया कि मछली पालन को केवल पारंपरिक गतिविधि तक सीमित न रखते हुए इसे ग्रामीण परिवारों की आय का स्थायी साधन बनाने की दिशा में कार्य किया जाए। इसी तरह पशुपालन के क्षेत्र में भी ग्रामीण एवं आदिवासी परिवारों को प्रोत्साहित करने, उन्हें प्रशिक्षण उपलब्ध कराने और विभागीय योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया गया। कृषि एवं उद्यानिकी गतिविधियों के माध्यम से भी ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई। अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों और किसानों की जरूरतों के अनुसार योजनाएं संचालित करने के निर्देश दिए गए, ताकि अधिक से अधिक परिवारों को आय के स्थायी साधन उपलब्ध हो सकें।

        ’श्रमिक कार्ड बनाने की संख्या बढ़ाने के निर्देश’

          बैठक में श्रम विभाग के कार्यों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। आयोग के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष ने जिले में श्रमिकों का पंजीयन बढ़ाने और अधिक से अधिक पात्र श्रमिकों के श्रमिक कार्ड बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में श्रमिक शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के पात्र हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में वे इन योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते। ऐसे श्रमिकों की पहचान कर उनका पंजीयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

          अधिकारियों को ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में शिविर आयोजित कर श्रमिकों को योजनाओं की जानकारी देने तथा श्रमिक कार्ड बनाने की प्रक्रिया को आसान बनाने के निर्देश दिए गए। आयोग ने श्रमिकों को शासन की योजनाओं से जोड़ने के लिए विभागीय स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया।

खनिज और पंचायत विभाग के कार्यों की समीक्षा

खनिज विभाग एवं पंचायत तथा ग्रामीण विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा के दौरान रेत, गिट्टी आदि से संबंधित कार्यों में नियमों का पालन सुनिश्चित करने की बात कही गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि विकास कार्यों के लिए आवश्यक खनिज संसाधनों के उपयोग में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया जाए। साथ ही ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया।

          ’खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने पर जोर’

खेल एवं युवा कल्याण विभाग की समीक्षा करते हुए जिले में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। आयोग के अध्यक्ष श्री मण्डावी ने कहा कि नारायणपुर सहित पूरे बस्तर संभाग में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें उचित प्रशिक्षण एवं संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

जिले को खेल के क्षेत्र में बस्तर संभाग के बेहतर जिलों में शामिल करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने की आवश्यकता बताई गई। विभिन्न खेलों के प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और खिलाड़ियों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं की भी समीक्षा की गई।

          ’मलखंभ को जीवंत रखने प्रशिक्षण पर जोर’

          बैठक में पारंपरिक खेल मलखंभ को लेकर भी चर्चा हुई। आयोग के अध्यक्ष ने मलखंभ जैसी पारंपरिक खेल विधाओं को जीवंत बनाए रखने और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने अधिक से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देने तथा प्रशिक्षण व्यवस्था को बेहतर एवं पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभावान बच्चों एवं युवाओं की पहचान कर उन्हें उचित मंच उपलब्ध कराने की बात भी कही गई।

’स्व सहायता समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर’

          महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान स्व सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए गए। आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की महिलाओं को स्थानीय संसाधनों और उनकी रुचि के अनुरूप रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए। इससे महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ स्वयं भी आत्मनिर्भर बन सकेंगी।

          उन्होंने स्व सहायता समूहों को शासन की विभिन्न योजनाओं से जोड़ने, उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में भी प्रभावी पहल करने की आवश्यकता बताई।

’अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ’

समीक्षा बैठक के दौरान आयोग के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। विशेषकर आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने और पात्र हितग्राहियों को लाभ दिलाने के लिए अधिकारी सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता सुनिश्चित की जाए। विभागीय अधिकारी मैदानी क्षेत्रों का नियमित भ्रमण करें और लोगों की समस्याओं को सीधे सुनकर उनका निराकरण सुनिश्चित करें।

          बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों में संचालित योजनाओं एवं प्रगति की जानकारी आयोग के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत की। आयोग के पदाधिकारियों ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए जिले में विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए निरंतर प्रयास करने की बात कही।

          बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, नगरपालिका अध्यक्ष इंद्रप्रसाद बघेल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रताप सिंह मंडावी, अध्यक्ष जनपद पंचायत पिंकी उसेंडी, जिला एवं जनपद पंचायत सदस्यगण, नगरपालिका के पार्षदगण, जिला पंचायत सीईओ चित्रकांत चाली ठाकुर, संयुक्त कलेक्टर टीआर माहेश्वरी, एसडीएम डॉ. सुमित गर्ग, अभयजीत मंडावी, जिला शिक्षा अधिकारी महेंद्रनाथ पाण्डे, सहायक आयुक्त तनुजा नाग, उपसंचालक पंचायत एसपाल प्रेक्षा सहित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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