रेलवे में पटरियां मरम्मत की, रोज 8 घंटे की पढ़ाई, अब प्रह्लाद मीणा बने IPS

सफलता किसी की मोहताज नहीं होती, बस मन में दृढ़ संकल्प और मेहनत करने की इच्छा होनी चाहिए। इस बात को सच साबित कर दिखाया है राजस्थान के दौसा जिले के एक छोटे से गांव में जन्मे प्रह्लाद मीणा ने। एक समय रेलवे में गैंगमैन के रूप में पटरियों की मरम्मत करने वाले प्रह्लाद आज भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के एक सम्मानित अधिकारी हैं। उनकी यह कहानी देश के लाखों उन छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो संसाधनों की कमी या आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।
अभावों से भरा बचपन और पढ़ाई का जज्बा
प्रह्लाद मीणा का बचपन बेहद गरीबी और अभावों में बीता। उनके परिवार के पास केवल दो बीघा जमीन थी, जिससे जीवन यापन करना काफी कठिन था। बचपन में ही वे जानवर चराने के साथ-साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रखते थे। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी शिक्षा का महत्व कम नहीं होने दिया और परिस्थितियों के सामने घुटने टेकने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बनाया।
गैंगमैन की पहली नौकरी से शुरुआत
आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उन्होंने शुरुआत में रेलवे में गैंगमैन (ग्रुप डी) की नौकरी चुनी, जहां उनका काम रेल पटरियों की देखभाल और मरम्मत करना था। ओडिशा के भुवनेश्वर में रेलवे में ड्यूटी करते हुए भी उनके मन में हमेशा कुछ बड़ा हासिल करने का जुनून था। उन्होंने इस नौकरी को मजबूरी न मानकर आगे बढ़ने की सीढ़ी बनाया। बाद में वे दिल्ली में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO) के पद पर भी कार्यरत रहे।
8 घंटे की ड्यूटी के साथ बिना कोचिंग की तैयारी
जब प्रह्लाद ने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी (UPSC) परीक्षा देने का फैसला किया, तब उनके पास न तो महंगे संसाधन थे और न ही किसी कोचिंग का सहारा। उन्होंने 8 से 9 घंटे की नौकरी के साथ समय का बेहतरीन टाइम मैनेजमेंट किया। वे रोजाना सुबह 4 बजे उठकर पढ़ाई करते थे, ऑफिस के लंच ब्रेक में पढ़ते थे और मेट्रो में सफर के दौरान अखबार पढ़कर करंट अफेयर्स की तैयारी करते थे।
3 असफलताएं भी नहीं डिगा सकीं हौसला
प्रह्लाद मीणा को वर्ष 2013 और 2014 में यूपीएससी की मुख्य परीक्षा देने का अवसर प्राप्त हुआ। हालांकि, वर्ष 2015 की प्रारंभिक परीक्षा में उन्हें सफलता हासिल नहीं हो सकी। संघर्ष के इस रास्ते में प्रह्लाद को लगातार तीन बार असफलता का सामना करना पड़ा और लोगों ने उनका मजाक भी उड़ाया। लेकिन उन्होंने हार मानने की बजाय अपनी कमियों को दूर किया। उन्होंने निबंध लेखन और अपने वैकल्पिक विषय ‘हिंदी साहित्य’ को मजबूत बनाया। अपनी असफलताओं को उन्होंने सबसे बड़ा शिक्षक माना और दुगनी मेहनत से फिर खड़े हुए।
2017 में पूरा हुआ IPS बनने का सपना
प्रह्लाद मीणा की कड़ी मेहनत, धैर्य और निरंतरता का परिणाम साल 2017 में मिला, जब उन्होंने यूपीएससी परीक्षा रैंक 951 के साथ पास कर IPS बनने का अपना सपना पूरा कर लिया। सबसे खास बात यह रही कि जिस ओडिशा राज्य में वे कभी रेलवे गैंगमैन की नौकरी करते थे, IPS बनने के बाद उन्हें उसी ओडिशा कैडर में सेवा देने का अवसर मिला।
छात्रों को संदेश देते हुए IPS प्रह्लाद मीणा कहते हैं कि बहुत सारी किताबें पढ़ने की जगह सीमित किताबों का बार-बार रिवीजन करना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में अपने आत्मविश्वास को कभी खोने नहीं देना चाहिए।




