नक्सल प्रभावित बालाघाट को नई पहचान देकर विदा हुए कलेक्टर मृणाल मीना, 2 साल में विकास और विश्वास की बदली तस्वीर

मध्य प्रदेश में 28 जुलाई को प्रशासनिक फेरबदल हुआ है. इस लिस्ट में 8 IAS अफसरों का नाम है. इसमें दो जिलों को नए कलेक्टर मिले है. इसमें बालाघाट और छतरपुर के कलेक्टर बदले गए है. बालाघाट के नए कलेक्टर कुमार सत्यम होंगे. वहीं, बालाघाट के मौजूदा कलेक्टर मृणाल मीना छतरपुर में अपनी सेवाएं देंगे. कलेक्टर मृणाल मीना नक्सल प्रभावित बालाघाट में आए थे. अब वह नक्सल मुक्त बालाघाट से जा रहे है.
कोई पूर्वाग्रह के साथ नहीं आया
बालाघाट जिले को लेकर हमेशा से यह धारणा रही है कि यह पिछड़ा हुआ और नक्सल प्रभावित जिला है. ऐसे में कई अफसर यहां पर ज्वाइनिंग लेने से कतराते थे. मृणाल मीना कहते हैं कि मैं कभी ऐसी बालाघाट के लिए ऐसी कोई धारणा नहीं बनाई थी. बिना किसी धारणा के बालाघाट आया था. शायद यहीं सही अपरोच रहती है. मुझे यह पता था कि यह शांति पूर्ण इलाका है. नक्सलवाद जरूर एक समस्या रही है लेकिन शासन की तय डेडलाइन के पहले ही उस टारगेट को पूरा किया गया. अब विकास आधारित योजनाओं को पूरा करने का पूरा स्कोप है. मैं जरूर किसी विचार या धारणा के साथ नहीं आया लेकिन अच्छी यादों के साथ जा रहा हूं.
नक्सली मशीने जला देते थे लेकिन
बालाघाट के विकास से पिछड़ने के पीछे एक वजह यह भी रही है कि यहाँ नक्सली विकास का विरोध करते रहे है. ऐसे में इस समस्या की वजह से सालों से कई विकास कार्य अटके रहे. इस पर कलेक्टर मृणाल मीना कहते हैं कि नक्सल प्रभावित इलाकों में सेफ्टी का इश्यू हमेशा रहता था. नक्सली अक्सर मशीनें जला देते थे. ठेकेदारों को काम रोकने के लिए परेशान करते थे. ऐसे में पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर इस समस्या से भी निपटा गया. इसमें RCPL की तहत कई सड़कों का निर्माण हुआ. इसमें हर दिन कार्यों की समीक्षा होती थी. ऐसे में सभी ने समय पर और तेजी काम किया. इस दौरान 30 हाईलेवल ब्रिज और 30 से ज्यादा सड़कों का पूरा हुआ. यह उन इलाकों के लिए फायदेमंद साबित हुई.
कई योजनाओं में बालाघाट रहा अव्वल
बालाघाट गंगा जल संवर्धन, पीएम आवास योजना, श्रम योगी मान धन योजना सहित कई योजनाओं के लक्ष्य की पूर्ति में बालाघाट का अव्वल स्थान रहा है. सीएम हेल्पलाइन हो या फिर जन सुनवाई में आए प्रकरणों में निराकरण के मामलों में भी बालाघाट का बेहतर स्थान रहा है. कलेक्टर मृणाल ने कहा कि बीते दो सालों में सभी साथियों ने अच्छा काम किया है. इसके लिए रूट लेवल पर काम किया गया. गांव-गांव में कैंप लगाए गए और रात्रिकालीन कैंप भी लगाए गए. यहीं शासन से जो भी योजनाओं के निर्देश शासन से मिले हैं उस में बालाघाट जिले ने अच्छा स्थान पाया है.
अब जानिए IAS मृणाल मीना के चर्चित 5 का
कलेक्टर मृणाल मीना ने 13 अगस्त 2024 को बालाघाट की कमान अपने हाथों में ली थी. उसके बाद नक्सल प्रभावित इलाके और गैर नक्सल प्रभावित इलाकों के विकास के अलग-अलग रणनीति बनाकर काम किया था. इसमें देखा गया था कि बालाघाट के मैदानी इलाके और पहाड़ी इलाके के लिए अलग-अलग प्लानिंग की गई थी. ऐसे में जानेंगे कलेक्टर मृणाल मीना के पांच अहम काम, व्यवस्थाओं में सुधार हुआ
वनाधिकार पट्टा वितरणबीते एक साल में व्यक्ति वनाधिकार एक्ट के तहत 6 हजार 800 से ज्यादा हितग्राहियों को खेती के लिए पट्टे दिए गए है. ऐसे में अब वह बिना किसी डर के अपनी खेती के काम कर सकेंगे. इसमें जिला प्रशासन के साथ वन विभाग और पंचायत सचिवों की भी अहम भूमिका रही है.
2. आंगनवाड़ी में पारदर्शिताकलेक्टर मृणाल मीना ने आंगनवाड़ी में होने वाले खाद्यान भ्रष्टाचार को रोकने और बच्चों की अटेंडेंस बढ़ाने के लिए एक ऐप डेवलप करवाया था. राइज बाल गिनती ऐप आंगनबाड़ी केंद्रों में सुधार के लिए मील का पत्थर साबित होगा. पोषण वितरण में जो गड़बड़ियां रोकी जा सकेगी. ऐसे में कुपोषण, बच्चों की अटेंडेंस, हॉट मील कुक सहित कई चीजों में पारदर्शिता आएगी.
नक्सल प्रभावित इलाकों के बच्चों की दिलाई नौकरी बीते साल एक गूगल शीट फ्लोट से युवाओं का डेटा तैयार कर रहे हैं. इसके लिए प्रशासन बेरोजगार युवाओं की डिजिटल रजिस्ट्री तैयार की जा रही है. ऐसे में उनकी योग्यताओं के मुताबिक एक ब्लू प्रिंट तैयार कर रही है. इसके बाद सीधे ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स सहित दूसरी कंपनियों को बालाघाट बुलाकर उन्हें रोजगार दिया गया. डेटा शीट में कैंडिडेट की प्रोफाइल और योग्यता के मुताबिक, कंपनी को बुलाया जाता है. महीने में दो बार रोजगार मेला आयोजित होता है, जहां पर देश की प्रतिष्ठित कंपनियां आती है और आवेदक भी आते हैं और कंपनी की जरूरत और कैंडिडेट की योग्यता के मुताबिक उन्हें रोजगार मिलता है.
4. नक्सल उन्मूलन में भी अहम भूमिका
बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीना ने कई ऐसी पहल की, जिससे नक्सल प्रभावित इलाकों के लोगों का भरोसा सरकार के प्रति बढ़ा. सुरक्षा एजेंसियों के साथ जाकर कई बार कैंप आयोजित किए जाते थे. इसमें खुद कलेक्टर मृणाल मीना भी कैंप के माध्यम से नक्सिलयों से सरेंडर की अपील करते थे. उन्हीं के एक वीडियों को नक्सलियों के एक डिवीजन के हेड ने कई बार देखने के बाद सरेंडर का मन बनाया था.
5. डिजिटलाइजेशन और ई-ऑफिस की शुरुआत
सरकारी तंत्र को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए उनके कार्यकाल के दौरान ही जिला कलेक्ट्रेट में ई-ऑफिस (e-Office) प्रक्रिया की शुरुआत की गई, जिससे कागजी कामकाज में तेजी आई और फाइलों का निपटारा जल्द होने लगा.
जानिए कौन है IAS अफसर
बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीना मूलत राजस्थान के भरतपुर के रहने वाले है. उनके पिता भी प्रशासनिक सेवक रहे है. उन्होंने NALSAR यूनिवर्सिटी हैदराबाद से कानून की पढ़ाई की. कुछ समय तक उन्होंने इस क्षेत्र में इंटर्नशिप भी की. उन्होंने पहले ही अटैम्प्ट में UPSC जैसी कठिन परीक्षा पास कर ली. वह 2015 बैच कै IAS है. उन्होंने 174वीं रैंक हासिल की थी. इसके बाद उनकी पहली पोस्टिंग रीवा जिले में बतौर सहायक कलेक्टर के पद पर हुई. फिर सबलगढ़ एसडीएम और नगर निगम कमिश्नर के पद पर भी रहे. वहीं, उज्जैन में जिला पंचायत सीईओ और महाकाल मंदिर प्रशासक के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी. बालाघाट में दो साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद अब वह छतरपुर कलेक्टर के तौर अपनी सेवाएं देंगे.



