छत्तीसगढ़

कुईकुकदुर को मिला अपना अध्यक्ष आदिवासी बेटी शशीलता बैगा बनीं चितेरे फाउंडेशन ब्लॉक अध्यक्ष, राष्ट्रीय चित्रकार बलबीर प्रसाद विश्वकर्मा ने सौंपा नियुक्ति पत्र

कुईकुकदुर को मिला अपना अध्यक्ष आदिवासी बेटी शशीलता बैगा बनीं चितेरे फाउंडेशन ब्लॉक अध्यक्ष, राष्ट्रीय चित्रकार बलबीर प्रसाद विश्वकर्मा ने सौंपा नियुक्ति पत्र

कुंडा — आदिवासी अंचल की विलुप्त होती पारंपरिक कलाओं को सहेजने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय फलक पर स्थापित करने के संकल्प के साथ ‘भोरमदेव आदिवासी चितेरे फाउंडेशन’ ने अपने संगठन का विस्तार तेज कर दिया है। इसी कड़ी में संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रतिष्ठित चित्रकार श्री बलबीर प्रसाद विश्वकर्मा के नेतृत्व में सुश्री शशीलता बैगा को कुईकुबदुर ब्लॉक की कमान सौंपी गई है।
उनकी कार्यकुशलता और समाज के प्रति अटूट जुड़ाव को देखते हुए फाउंडेशन ने उन्हें इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी है।
​वरिष्ठ पदाधिकारियों और ब्लॉक अध्यक्षों ने दी बधाई
​सुश्री शशीलता की नियुक्ति पर संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों में हर्ष का माहौल है। सहायक डायरेक्टर सुश्री तान्या मरावी ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।कबीरधाम जिला अध्यक्ष श्री लीलाधर नेताम व पंडरिया ब्लॉक अध्यक्ष श्री मन्नू जयराम मरावी ने भी इस नियुक्ति का स्वागत किया है। श्री मन्नू जयराम मरावी ने अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि शशीलता बैगा की सक्रियता से न केवल कुईकुबदुर बल्कि पूरे जिले में जनजातीय गौरव और कला को नई ऊर्जा मिलेगी।
​मिशन 2026: स्कूलों और कॉलेजों में जनजातीय कला की गूँज
​अपनी नियुक्ति के तुरंत बाद नवनियुक्त ब्लॉक अध्यक्ष शशीलता बैगा ने ‘निशुल्क जनजातीय कला प्रशिक्षण शिविर 2026’ के मिशन को गति देना शुरू कर दिया है। वे वर्तमान में कुईकुबदुर क्षेत्र के विभिन्न स्कूल-कॉलेजों में जाकर विद्यार्थियों और युवाओं से सीधा संवाद कर रही हैं।
​शशीलता बैगा स्वयं छात्र-छात्राओं से मिलकर उन्हें अपनी पारंपरिक कला की बारीकियों से अवगत करा रही हैं और मौके पर ही प्रशिक्षण शिविर के लिए आवेदन फॉर्म भरवा रही हैं। युवाओं में अपनी संस्कृति और चित्रकारी को सीखने के प्रति भारी उत्साह देखा जा रहा है।
​कला के जरिए सशक्त होगा समाज: राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बलबीर प्रसाद विश्वकर्मा ने अपना विजन साझा करते हुए कहा कि, “हमारी कला ही हमारी पहचान है। इस निशुल्क शिविर के माध्यम से हम स्थानीय प्रतिभाओं को तराशकर उन्हें एक बड़ा मंच प्रदान करेंगे। शशीलता बैगा का समर्पण यह सिद्ध करता है कि समाज अब अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए जागृत हो चुका है।” निशुल्क जनजातीय कला प्रशिक्षण 2026
​आवेदन की अंतिम तिथि 28 अप्रैल
​विदित हो कि इस विशेष निशुल्क प्रशिक्षण शिविर के लिए पंजीयन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इच्छुक विद्यार्थी 28 अप्रैल 2026 तक अपना आवेदन फॉर्म जमा कर सकते हैं। इस पहल की सराहना पूरे जिले के बुद्धिजीवियों और कला प्रेमियों द्वारा की जा रही है।

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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