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समंदर के नीचे दौड़ेगी बुलेट ट्रेन, भारत पहुंची ‘महामशीन’, जुलाई से शुरू होगा काम

देश की सबसे हाईटेक रेल प्रोजेक्ट मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट में बड़ी कामयाबी मिली है. समंदर के नीचे टनल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली विशाल महामशीन यानी टनल बोरिंग मशीन (TBM) अब भारत पहुंच चुकी है. इस मशीन के आने से प्रोजेक्ट को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद हैइस प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारी अचल खरे ने बताया कि यह मशीन इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए मील का पत्थर साबित होगी. खास बात यह है कि इसी मशीन से समुद्र के अंदर करीब 7 किलोमीटर लंबी टनल बनाई जाएगी.13.65 मीटर डायमीटर वाली टनल बोरिंग मशीन का इस्तेमाल
दरअसल, यह कोई साधारण मशीन नहीं बल्कि एक मॉडर्न टनल बोरिंग मशीन (TBM) है. पहली बार भारत में 13.65 मीटर डायमीटर वाली इतनी बड़ी मिक्स्ड-शील्ड टनल बोरिंग मशीन का इस्तेमाल हो रहा है. यही वजह है कि इसे महामशीन कहा जा रहा है. इस विशाल मशीन को साइट तक पहुंचाने के लिए 150 से ज्यादा ट्रेलरों की जरूरत पड़ेगी. वहीं, इसे पूरी तरह असेंबल करने में करीब 90 दिन लगेंगेजुलाई के पहले हफ्ते से शुरू होगा काम

खुदाई, मलबा हटाना और टनल को कंक्रीट से मजबूत करती है TBM
यह मशीन एक साथ कई काम करती है जैसे खुदाई, मलबा हटाना और टनल को कंक्रीट से मजबूत करना. ठाणे क्रीक के नीचे और पहाड़ी इलाकों में बनने वाली इस टनल के लिए एडवांस इंजीनियरिंग की जरूरत है, जिसे यह मशीन पूरा करेगी.

इन राज्यों को कनेक्ट करेगी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट
पूरी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट गुजरात, दादरा एवं नगर हवेली और महाराष्ट्र में फैली हुई है. अब तक सैकड़ों किलोमीटर में पिलर, गर्डर और ट्रैक से जुड़ा काम पूरा हो चुका है. ऐसे में महामशीन के आने से यह सपना और तेजी से हकीकत बनने की ओर बढ़ रहा है.


योजना के मुताबिक, जुलाई के पहले हफ्ते से यह मशीन काम करना शुरू कर देगी. इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत इसकी सुरक्षा और सटीकता है. जहां पारंपरिक तरीकों से सुरंग बनाना रिस्क भरा होता है, वहीं TBM बिना धमाके के सुरक्षित तरीके से खुदाई करती है. खासकर घनी आबादी वाले इलाकों और समुद्र के नीचे काम करने में यह तकनीक बेहद कारगर साबित होती है.

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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