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चंडीगढ़ में जन्मे अर्शदीप डांग ने रचा इतिहास, वर्ल्ड वॉर-2 के बाद ब्रिटेन में लड़ाकू पायलट बनने वाले पहले सिख

चंडीगढ़। चंडीगढ़ में जन्मे 28 वर्षीय फ्लाइट लेफ्टिनेंट अर्शदीप सिंह डांग ने ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स में इतिहास रच दिया है। वह दूसरे विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की वायुसेना में लड़ाकू पायलट के पंख हासिल करने वाले पहले सिख बन गए हैं। 14 अगस्त को उत्तरी वेल्स स्थित रॉयल एयर फोर्स वैली में आयोजित समारोह में उन्हें लड़ाकू पायलट के पंख प्रदान किए गए।अर्शदीप सिंह डांग वर्ष 2021 में ब्रिटेन की वायुसेना में शामिल हुए थे। उन्होंने वर्ष 2022 में अधिकारी प्रशिक्षण पूरा किया और इसके बाद कठिन उड़ान प्रशिक्षण से गुजरते हुए लड़ाकू विमान उड़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया। उन्होंने जुलाई 2026 में पायलट पंखों की परीक्षा सफलतापूर्वक पास कीवायुसेना के अनुसार अर्शदीप चार उड़ान प्रशिक्षण विद्यालय में टेक्सन विमान पर प्रशिक्षण पूरा करने वाले पहले सिख प्रशिक्षु भी हैं। वह अपने प्रशिक्षण समूह में भारतीय मूल के एकमात्र पायलट रहे।

छह साल की उम्र में ब्रिटेन चले गए थे

अर्शदीप का जन्म वर्ष 1998 में चंडीगढ़ में हुआ था। जब वह छह साल के थे, तब उनका परिवार ब्रिटेन चला गया। उनके पिता जगदीप सिंह डांग लुधियाना से और मां गगनदीप कौर अमृतसर से हैं। परिवार इंग्लैंड के साउथॉल में रहता है।अर्शदीप ने ब्रिस्टल विश्वविद्यालय से गणित और दर्शनशास्त्र की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने अधिकारी प्रशिक्षण पूरा किया। वर्ष 2023 में प्राथमिक उड़ान प्रशिक्षण लिया और वर्ष 2024 में लड़ाकू विमान प्रशिक्षण के लिए चुने गए। अब वह अग्रिम लड़ाकू विमान उड़ाने से पहले करीब एक वर्ष का और कठिन प्रशिक्षण लेंगे।

मां और दादा से मिली प्रेरणा

अर्शदीप ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार को दिया। उन्होंने बताया कि उनके दादा सरदार संतोख सिंह डांग का सपना था कि उनके पिता पायलट बनें। इसी सपने ने परिवार में विमानन के प्रति रुचि पैदा की।

उन्होंने कहा कि उनकी मां ने कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद उनका पालन-पोषण किया और उन्हें सिख मूल्यों से जोड़े रखा। घर में पंजाबी भाषा का इस्तेमाल होता रहा। उन्होंने बताया कि ‘चढ़दी कला’ की भावना ने प्रशिक्षण के कठिन दौर में उन्हें सकारात्मक बनाए रखा

सिखों की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाया

अर्शदीप की उपलब्धि ब्रिटेन की सैन्य सेवा में सिखों के लंबे योगदान से भी जुड़ी है। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हरदित सिंह मलिक ब्रिटेन में भारतीय मूल के शुरुआती पायलटों में शामिल थे। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान स्क्वाड्रन लीडर मोहिंदर सिंह पुज्जी ने भी ब्रिटिश वायुसेना में सेवा दी थी।

अर्शदीप ने कहा कि वह चाहते हैं कि वह सिख समुदाय के युवाओं के लिए प्रेरणा बनें। उन्होंने उम्मीद जताई कि वह इस उपलब्धि वाले अंतिम सिख नहीं होंगे।

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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