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बारिश आते ही जंगल की ओर दौड़े लोग, फ्री में लाए मोस्ट एक्सपेंसिव सब्जी, स्वाद ऐसा चिकन-मटन फेल

शहडोल:विंध्य अंचल के शहडोल में पिछले तीन दिनों से मानसून की बारिश देखने मिल रही है. 3 जुलाई शुक्रवार के दिन सुबह-सुबह थोड़ा सा मौसम खुला, तो क्षेत्र के सरई जिसे साल भी बोलते हैं के जंगलों की ओर काफी तादात में आदिवासी जाते हुए दिखाई दिए. साल के पेड़ों के नीचे आदिवासी जंगल की बरसाती बहुमूल्य चीज की तलाश करते हुए नजर आए.

मानसून की बारिश, जंगल भागे आदिवासी

मानसून की बारिश के साथ ही इन दिनों सरई के जंगलों में सुबह-सुबह काफी तादात में ग्रामीण देखने को मिल रहे हैं, वजह है कि आदिवासी समाज के लोग सरई के जंगल से बहुमूल्य सब्जी की तलाश में लगे हैं. जिसे साल में एक दो बार ग्रामीण जरूर खाते हैं. अब तो इसका इतना विस्तार हो गया है कि शहरी लोग भी इसे ढूंढ कर खाते हैं. ग्रामीण इसे अपनी ताकत का राज भी बताते हैं, क्योंकि यह सब्जी साल के जंगलों के नीचे ही मिलती है.वो बताते हैं कि पुटू की सब्जी साल में विशेष समय में ही एक बार ही मिलती है, इसलिए साल में दो-तीन बार वह लोग जरूर खाते हैं. वजह है ये सेहत के लिए वरदान है, बहुत ही पौष्टिक सब्जी है और मानसून की पहली बारिश के बाद ही यह निकलता है. अवनीश कहते हैं कि काफी संख्या में लोग सरई के पेड़ों के नीचे पुटू की सब्जी की तलाश कर रहे हैं. बाजार में इसकी काफी डिमांड रहती है. इन दिनों तो आप सुबह-सुबह सरई के जंगलों में काफी ग्रामीणों को पाएंगे. लोग काम छोड़ देंगे, लेकिन अगर ये सब्जी कहीं मिल रही है, तो ग्रामीण पुटू को ही प्राथमिकता देंगे.”.

बाजार में काफी महंगा

रहवासी भैया लाल कहते हैं कि “वो जिस सब्जी की तलाश कर रहे हैं, वो जंगल की बहुमूल्य चीज है और सेहत का सबसे बड़ा खजाना भी है. आप देखेंगे कि ज्यादातर ग्रामीण साल में एक दो बार इस सब्जी का सेवन जरूर करते हैं. बाजार में देखेंगे तो ₹700 से लेकर के हजार रुपए किलो तक बिकता है. इन दिनों तो 800 से हजार रुपए किलो के नीचे कोई छूने भी नहीं देगा. हालांकि मार्केट में उतना नहीं आ रहा है, लेकिन अब मानसून की बारिश हो गई है. एक-दो दिन के बाद मार्केट में इसकी भरमार हो जाएगी, लेकिन फिर भी महंगी होगी. लोग इसमें मोलभाव भी नहीं करते. जितना रेट बेचने वाला बोल दिया, लोग उतने दाम में ही लेकर चले जाते हैं.”

कैसे बनाएं पुटू की सब्जी ?

फतेहपुर गांव के पास ही सरई के जंगलों में रामदुलारी सिंह कई महिलाओं के साथ पुटू ढूंढ रही थी. जब हमने उनसे पूछा कि यह क्या कर रही हो तो वो बताती हैं कि “आज के सब्जी का जुगाड़ बना रही हैं. वो कहती हैं कि पुटू बहुत ही स्वादिष्ट सब्जी होती है. इसे बनाने के तरीके को लेकर वह बताती हैं कि इसे ड्राय और ग्रेवी दोनों तरह से बनाया जा सकता है.इसके लिए सबसे पहले पुटू को जंगल से लेने के बाद तीन-चार बार अच्छी तरह से पानी से धो लें. जिससे उसकी रेत या मिट्टी पूरी तरह से निकल जाए. इसके बाद जैसा खाना हो वैसा काट लें. अगर 1 किलो पुटू है, तो उसके लिए आधा किलो प्याज लेंगे, फिर प्याज को बारीक काट लें. मसाले में जीरा, तेज पत्ता, दाल चीनी, काली मिर्च, अदरक और लहसुन डाल लें. कटे हुए प्याज का आधे हिस्से को बताए हुए मसाले के साथ पीस लें और पेस्ट तैयार कर लें.इसके बाद गैस पर पैन रखने के बाद उसमें कुकिंड ऑयल डालें. तेल गर्म होने पर उसमें जीरा, तेज पत्ता, दाल चीनी और काली मिर्च का तड़का लगाए, थोड़ी देर में इसमें प्याज डाल दें. करीब 20 मिनट तक प्याज को धीमी आंच पर भूने, इसके बाद कटे हुए पुटू के टुकड़ों को डाल दें. जब पुटू भुन जाए तो उसमें मसाले का पेस्ट डाल लें. फिर इसमें हल्दी और स्वादानुसार नमक डाल दें. पुटू को मसाले के साथ 15-20 मिनट तक भुने, फिर पानी डालकर 10 मिनट तक उबालें. फिर आपकी पुटू की सब्जी तैयार हो गई. खाने में ये बहुत ही स्वादिष्ट पौष्टिक और रोग प्रतिरोधक होता है.”

पुटू सब्जी क्या है ?

शहडोल में सरई जिसे साल भी कहा जाता है. इमारती लकड़ियों में से एक होता है. इसके जंगलों की भरमार है. जगह-जगह आपको इसके जंगल मिल जाएंगे और इसीलिए यहां कुदरत का खजाना पुटू की सब्जी भी मिलती है. जो मानसून की पहली बारिश के साथ ही आना शुरू होती है और साल भर में एक बार ही मिलती है, लोकल भाषा में इसे पुटू कहा जाता है, अलग-अलग प्रदेशों में अलग-अलग स्थानीय नाम से भी जानते हैं. कहीं इसे रुगड़ा के नाम से जाना जाता है, तो कहीं पुटु, कहीं फुटू, कहीं बोडा कहीं इसे भुईं फोड़, के नाम से जाना जाता है. इसे जंगली मशरूम भी कहा जाता है.

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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