छत्तीसगढ़

आइसक्रीम और फ्रोजन डेजर्ट में क्या है अंतर, उपभोक्ता जागरूकता के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने दी जानकारी

आइसक्रीम और फ्रोजन डेजर्ट में क्या है अंतर, उपभोक्ता जागरूकता के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने दी जानकारी

“सही दवा, शुद्ध आहार-यही छत्तीसगढ़ का आधार” अभियान के तहत सतत निरीक्षण जारी

कवर्धा, 06 मई 2026। राज्य शासन के “सही दवा, शुद्ध आहार-यही छत्तीसगढ़ का आधार” अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जिले में संचालित विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों का व्यापक निरीक्षण किया गया। इस दौरान दातार इंटरप्राइजेस (नवीन बाजार), प्राची आइसक्रीम (भागुटोला) और माही आइस कैंडी (घोटिया रोड) सहित अन्य आइसक्रीम पार्लर, निर्माण इकाइयों एवं एजेंसियों में खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान संचालकों को स्वच्छता, भंडारण एवं लेबलिंग संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए तथा नियमों के कड़ाई से पालन के लिए निर्देशित किया गया।

आइसक्रीम बनाम फ्रोजन डेजट: उपभोक्ताओं को दी गई स्पष्ट जानकारी

निरीक्षण के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आम उपभोक्ताओं में आइसक्रीम और जमे हुए मिष्ठान (फ्रोजन डेजर्ट) को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इसे दूर करने के लिए विभाग द्वारा जागरूकता के लिए जानकारी दी गई। बताया गया कि आइसक्रीम में वसा का स्रोत दूध होता है, जिससे इसमें कैल्शियम और प्रोटीन जैसे पोषक तत्व मिलते हैं। वहीं, फ्रोजन डेजर्ट में वनस्पति तेल (जैसे पाम ऑयल) का उपयोग किया जाता है, जिससे इसकी पोषण गुणवत्ता अपेक्षाकृत कम होती है। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई कि वे उत्पाद खरीदते समय पैकेट पर अंकित विवरण अवश्य पढ़ें, ताकि सही उत्पाद की पहचान कर सकें।

अधिक सेवन से स्वास्थ्य जोखिम, संतुलित उपयोग की सलाह

खाद्य सुरक्षा विभाग ने फ्रोजन डेजर्ट के अधिक सेवन से संभावित स्वास्थ्य प्रभावों के प्रति भी आगाह किया। बताया गया कि इसमें मौजूद संतृप्त वसा और अधिक शर्करा हृदय स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकती है तथा लंबे समय में कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने और वजन बढ़ने का कारण बन सकती है।
कुछ मामलों में इसके सेवन से पाचन संबंधी समस्याएं भी देखी जा सकती हैं। बच्चों में अत्यधिक मीठे एवं वसायुक्त उत्पादों का सेवन दांतों की समस्या, मोटापा और असंतुलित खान-पान की आदतों को बढ़ावा देता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि फ्रोजन डेजर्ट प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन इसका सेवन सीमित एवं संतुलित मात्रा में ही किया जाना चाहिए। साथ ही, उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे भ्रामक प्रचार से बचते हुए खाद्य पदार्थों का चयन सोच-समझकर करें।

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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