धर्म

जीवन में खुश रहने का एक सीधा सा मंत्र है – नीरज

*जीवन में खुश रहने का एक सीधा सा मंत्र है – नीरज*
और वो ये कि हमारी उम्मीद स्वयं से होनी चाहिए किसी और से नहीं। स्वयं के पैरों पर उम्मीद ही हमें किसी दौड़ में विजेता बनाती है।

स्वयं के तीरों पर भरोसा रखने वाला कौन्तेय युद्ध भूमि में अकेला पड़ने के बावजूद भी सफल हो जाता है और दूसरों से उम्मीद रखने वाला दुर्योधन पितामह, द्रोण, कर्ण, कृपाचार्य जैसे अनगिनत योद्धाओं के साथ रहते हुए भी युद्ध भूमि में बुरी तरह असफल हो जाता है।

सूर्य स्वयं के प्रकाश से चमकता है और चन्द्रमा को चमकने के लिए सूर्य के प्रकाश पर निर्भर रहना होता है। दूसरे के प्रकाश से प्रकाशित होने की उम्मीद रखने के कारण ही चन्द्रमा की चमक एक जैसी नहीं रहती । कभी ज्यादा कभी कम तो कभी पूरी तरह क्षीण भी हो जाती है।

कमल उतनी ही देर अपना सौंदर्य बिखेरता है जितनी देर उसे सूर्य का प्रकाश प्राप्त होता है। इसका सीधा सा अर्थ केवल इतना कि दूसरों से प्राप्त खुशी कभी भी टिकाऊ नहीं हो सकती। इसलिए जीवन में सदा खुश रहना है तो दूसरों से किसी भी प्रकार की उम्मीद छोड़कर स्वयं ही उद्यम अथवा पुरुषार्थ में लगना होगा ताकि संपूर्ण जीवन प्रसन्नता से जिया जा सकें। ✍????ज्योतिष कुमार

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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