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दुर्ग निगम क्षेत्र में तालाबों पर मंडरा रहा बड़ा खतरा

बड़ा सवाल है कि क्या दुर्ग निगम क्षेत्र में तालाबों को पाटने का खेल चल रहा है?

दुर्ग / दुर्ग निगम क्षेत्र में तालाबों की बदहाली अब गंभीर सवाल खड़े कर रही है। वार्ड नंबर 4 के तालाब में कचरा डालकर उसे पाटे जाने का मामला सामने आने के बाद अब वार्ड नंबर 3 मठपारा के तालाब में भी कचरा डंप किए जाने की तस्वीरें सामने आई हैं। ऐसे में सवाल सीधा है—क्या कचरे की आड़ में शहर के तालाबों का अस्तित्व मिटाने की कोशिश हो रही है?

मठपारा तालाब में कथित तौर पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए कचरा लाकर डाले जाने की बात सामने आ रही है। अगर यह सही है तो बड़ा सवाल यह है कि तालाब में कचरा पहुंच कौन रहा है और किसकी अनुमति से? क्या यह जगह नगर निगम की अधिकृत डंपिंग साइट है? अगर नहीं, तो खुलेआम तालाब में कचरा डालने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

वार्ड 4 के बाद अब मठपारा—एक ही कहानी, अलग तालाब?
कुछ दिन पहले वार्ड नंबर 4 के तालाब में कचरा डाले जाने का मामला सामने आया था। अब वार्ड नंबर 3 के मठपारा तालाब की तस्वीरें भी उसी तरह के सवाल खड़े कर रही हैं।
यही वजह है कि अब मामला सिर्फ कचरा फेंकने तक सीमित नहीं रह गया है। सवाल तालाबों के भविष्य का है।
अगर तालाबों में लगातार मलबा और कचरा डाला जाता रहा, तो धीरे-धीरे जलभराव का क्षेत्र कम होगा और तालाब का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो सकता है। तालाब सिर्फ पानी का गड्ढा नहीं, बल्कि शहर के पर्यावरण और भू-जल व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

निगम से जनता का सीधा सवाल—कचरा किसकी अनुमति से?
दुर्ग नगर निगम को अब इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
क्या मठपारा तालाब कचरा डंप करने के लिए अधिकृत है?
अगर नहीं, तो वहां कचरा डालने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की पहचान कर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या निगम के पास इस तालाब की जमीन और सीमांकन का रिकॉर्ड है?
क्या हाल के दिनों में तालाब के क्षेत्रफल में कोई बदलाव हुआ है?
और सबसे अहम—वार्ड 4 के तालाब में कचरा डालने के मामले में निगम ने क्या कार्रवाई की? जांच हुई तो उसकी रिपोर्ट कहां है?
तालाब बचाने की जिम्मेदारी किसकी?
तालाबों को कचरे से भरना केवल सफाई व्यवस्था का सवाल नहीं है। यह पर्यावरण और सार्वजनिक संपत्ति से जुड़ा गंभीर विषय है। जल निकायों में कचरा डालने और उनके स्वरूप को नुकसान पहुंचाने पर पर्यावरणीय नियम लागू हो सकते हैं। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच और मौके का निरीक्षण जरूरी है।
लेकिन सवाल यह भी है कि जिन तालाबों की निगरानी और संरक्षण की जिम्मेदारी निगम की है, वहां दिनदहाड़े कचरा पहुंच रहा है तो निगम का निगरानी तंत्र आखिर कहां है?
क्या तालाबों पर किसी की नजर है?
शहर में तालाबों की जमीन को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में मठपारा तालाब में कचरा डाले जाने की घटना ने एक और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
क्या कचरा सिर्फ कचरा है या इसके पीछे तालाब की जमीन के भविष्य को लेकर कोई बड़ी योजना है?
इसका जवाब जांच से ही सामने आएगा।
फिलहाल दुर्ग की जनता निगम से सिर्फ आश्वासन नहीं, कार्रवाई और जवाब चाहती है।
क्योंकि सवाल सिर्फ मठपारा तालाब का नहीं है… सवाल यह है कि अगर आज तालाब कचरे में दबते रहे, तो कल दुर्ग शहर के हिस्से में बचेंगे कितने तालाब?

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