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बलात्कार की शिकार महिलाओं को अभी भी न्याय का इंतज़ार है.

अमूमन भारत में बलात्कार के मामले इतने भयावह होते हैं कि देश में सुर्खियां बनने के साथ साथ दुनियाभर के मीडिया में उनकी चर्चा होती है.

दिल्ली में 2012 में निर्भया के सामूहिक बलात्कार के बाद क़ानून को सख़्त बनाया गया और इसके बाद पुलिस के पास दर्ज होने वाले मामलों की संख्या भी बढ़ी है.

इसकी एक वजह महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाली यौन हिंसा पर बढ़ती बहस बताई जाती है, तो कई जानकार क़ानूनी सुधार की ओर भी इशारा करते हैं.

सरकार मौत की सज़ा जैसे कड़े प्रावधान भी लाई है.लेकिन कुछ विश्लेषकों के मुताबिक ऐसे प्रावधान खोखले और आम लोगों का गुस्सा ठंडा करने के लिए लाए जाते हैं और इनमें समस्या की गहराई और उसको जड़ से निपटाने पर ध्यान नहीं दिया गया है.

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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