
CG Police News:- राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरी और रायपुर ग्रामीण की दोहरी व्यवस्था लागू होने के 179 दिनों के भीतर ही इसके असर पर सवाल उठने लगे हैं। डीजीपी अरुणदेव गौतम ने शासन को भेजी रिपोर्ट में पुलिस मुख्यालय स्तर पर गठित समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि एक ही जिले में दोहरी पुलिस व्यवस्था से कानून-व्यवस्था, वीआईपी ड्यूटी और प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है। रिपोर्ट में पूरे जिले में एकीकृत कमिश्नरी व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की गई है।
रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरी और रायपुर ग्रामीण की अलग-अलग व्यवस्था अब सरकार के स्तर पर समीक्षा के दायरे में आ गई है। एक ही जिले में दो तरह की पुलिसिंग लागू होने के बाद सामने आई समस्याओं को लेकर डीजीपी अरुणदेव गौतम ने शासन को पत्र भेजा है। इसमें पुलिस मुख्यालय स्तर पर गठित एडीजी रैंक की समिति की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए दोहरी व्यवस्था से उत्पन्न कठिनाइयों का जिक्र किया गया है।
कमिश्नरी में अपराध घटे, देहात में पुलिसिंग कमजोर
पीएचक्यू की 100 दिनों की समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार कमिश्नरी क्षेत्र में अपराधों में कमी आई है और पुलिस की कार्रवाई बढ़ी है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में पुलिसिंग कमजोर हुई है और अपराध बढ़े हैं।
समिति ने दी एकीकृत व्यवस्था की सिफारिश
डीजीपी अरुणदेव गौतम द्वारा गठित एडीजी स्तर की उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पर्याप्त पुलिस बल और संसाधनों के बिना दोहरी व्यवस्था चलाना संभव नहीं है। इससे पुलिसिंग का स्तर प्रभावित होगा और सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। समिति ने पूरे जिले में एक ही यानी एकीकृत कमिश्नरी व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की है।
विधानसभा में गलत जवाब का मामला भी गरमाया
वरिष्ठ विधायक भोलाराम साहू के सवाल पर दोहरी व्यवस्था के कारण विधानसभा में गलत जवाब प्रस्तुत होने का मामला भी सामने आया। इसे लेकर उन्होंने गृह मंत्री को पत्र लिखकर चिंता जताई है।
तबादलों और क्षेत्राधिकार में भी दिक्कत
एक ही जिले में होने के बावजूद सिपाही और हवलदार के तबादलों के लिए डीजीपी स्तर तक फाइल भेजनी पड़ रही है। शासन की अनुमति के बिना नवा रायपुर का स्टाफ शहर में पदस्थ नहीं हो सकता।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि एयरपोर्ट, विधानसभा और मंत्रालय जैसे संवेदनशील वीवीआईपी क्षेत्र ग्रामीण पुलिस के अधिकार क्षेत्र में हैं, जबकि ग्रामीण एसपी और आईजी कार्यालय कमिश्नरी क्षेत्र में स्थित हैं। कई वार्ड और पंचायतें भी अधिसूचना के विपरीत बंटी हुई हैं।
दोहरी व्यवस्था बनाए रखने पर 50 करोड़ से अधिक का खर्च
रायपुर ग्रामीण के लिए अलग पुलिस जिला बनाए रखने की स्थिति में सरकार को 50 करोड़ रुपए से अधिक का अतिरिक्त खर्च करना होगा। इसके लिए अलग एसपी कार्यालय, पुलिस लाइन, आवासीय क्वार्टर, महिला थाना, अजाक थाना, क्राइम ब्रांच और ट्रैफिक पुलिस का नया ढांचा तैयार करना पड़ेगा। फिलहाल ग्रामीण एसपी संभागीय आयुक्त कार्यालय से काम कर रही हैं और तीनों एएसपी के पास भी स्थायी कार्यालय नहीं है।
पूरे जिले में कमिश्नरी लागू करने की तैयारी
रायपुर के जनप्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे जिले में एक समान पुलिस व्यवस्था लागू करने की मांग की है। सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्री विजय शर्मा पूरे जिले में कमिश्नरी व्यवस्था लागू करने के पक्ष में हैं और मुख्यमंत्री स्तर पर भी इस पर सहमति बन चुकी है। शासन अगस्त तक इस संबंध में घोषणा की तैयारी कर रहा है।
डिस्क्लेमर:- यह खबर दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तैयार की गई है। इसमें प्रयुक्त जानकारी का स्रोत संबंधित प्रकाशित समाचार है।




