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खाली समय में की घरों में रंगाई-पुताई, अब डॉक्टर बनेगा सूरज; नीट में हासिल किए

कड़ी मेहनत और पक्के इरादों के आगे परिस्थितियां भी घुटने टेक देती हैं।” इस कहावत को सच कर दिखाया है राजस्थान के अलवर जिले के रहने वाले सूरज सैनी ने। बेहद सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले सूरज ने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET UG) में 583 अंकों के साथ 99.16 परसेंटाइल हासिल करके हर किसी को हैरान कर दिया है। दीवारों पर रंग-रोगन (पेंटिंग) का काम करने वाले एक साधारण मजदूर के बेटे की इस शानदार सफलता ने पूरे इलाके को गौरवान्वित कर दिया है।

पारिवारिक उथल-पुथल और सरकारी स्कूल की पढ़ाई

सूरज की सफलता का यह सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। पारिवारिक उथल-पुथल के कारण उनके पिता परिवार से अलग रहते हैं। इन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सूरज ने अपनी पढ़ाई कभी बंद नहीं की। उन्होंने अपनी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा सरकारी स्कूलों से पूरी की। अपनी लगन के दम पर उन्होंने 10वीं कक्षा में 87% और 12वीं कक्षा में 85% अंक हासिल कर अपनी काबिलियत का लोहा पहले ही मनवा लिया था।

मौसी से मिली प्रेरणा, तो मजबूरी में सीखा पेंटिंग का काम

सूरज की मौसी एक एएनएम (ANM) नर्स हैं। उन्हें देखकर ही सूरज के मन में सफेद कोट पहनने और डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करने का सपना अंकुरित हुआ था। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने 11वीं में बायोलॉजी विषय चुना।लेकिन डॉक्टर बनने का यह सपना आर्थिक तंगी के रास्ते से होकर गुजरता था। परिवार का पेट पालने और पढ़ाई के खर्च में मदद करने के लिए सूरज ने खुद मकानों में सफेदी-पुताई का काम सीखा। स्कूल की छुट्टियों, रविवार और पढ़ाई के बाद मिलने वाले खाली समय में वह लोगों के घरों में पेंटिंग और पुताई का काम करते थे, ताकि मिलने वाले पैसों से घर की आय में थोड़ा योगदान दे सकें।

सफलता जो देश भर के छात्रों को देती है सीख

दिन भर मजदूरी और रात में किताबों के साथ घंटों की पढ़ाई—सूरज का यह रूटीन महीनों तक चला। जब परिणाम आया तो सूरज और उनका परिवार खुशी से झूम उठा। सूरज ने इस परीक्षा में 16,569वीं ऑल इंडिया रैंक (AIR) और 7,800वीं ओबीसी रैंक हासिल की है, जिससे उनके लिए किसी बेहतरीन सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिले की राह पूरी तरह साफ हो गई है। सूरज की यह उपलब्धि देश भर के उन लाखों विद्यार्थियों के लिए एक मिसाल है जो संसाधनों की कमी को रूकावट मानते हैं। सूरज सैनी ने यह साबित कर दिया है कि अगर आपके इरादे मजबूत हों, तो गरीबी और कठिनाइयां भी आपकी मंजिल का रास्ता नहीं रोक सकतीं।

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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