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नौकरी और जिम्मेदारियों के बीच जारी रखी पढ़ाई, 55 साल में बने गोल्ड मेडलिस्ट

शिक्षकीय दायित्वों के साथ उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता हासिल कर प्रस्तुत किया आजीवन सीखने का प्रेरणादायी उदाहरण*

रायपुर/ सीखने की कोई उम्र नहीं होती, दृढ़ संकल्प और निरंतर परिश्रम से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। इस कथन को चरितार्थ करते हुए शासकीय कन्या हाई स्कूल सारखी (अभनपुर), छत्तीसगढ़ में पदस्थ व्याख्याता श्री बसंत कुमार साहू ने 55 वर्ष की आयु में एम.ए. शिक्षा विषय में गोल्ड मेडल प्राप्त कर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उनकी इस सफलता से विद्यालय परिवार, सहकर्मियों एवं क्षेत्र में हर्ष का वातावरण है।

विशेष उल्लेखनीय बात यह है कि श्री साहू ने अपने नियमित शिक्षकीय कार्यों एवं विभागीय दायित्वों का निर्वहन करते हुए अध्ययन जारी रखा और उच्च शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर गोल्ड मेडल प्राप्त किया। उनकी यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा अर्जित करने और स्वयं को निरंतर बेहतर बनाने की कोई आयु सीमा नहीं होती। दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन, समय प्रबंधन और सतत परिश्रम के बल पर जीवन के किसी भी पड़ाव पर नई ऊँचाइयाँ हासिल की जा सकती हैं।

दिनांक 03 नवंबर 2026 को पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, कोनी, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में आयोजित दीक्षांत समारोह में विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। समारोह की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ शासन के माननीय राज्यपाल श्री रमेन डेका जी ने की। दीक्षांत अतिथि के रूप में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC), नई दिल्ली के अध्यक्ष प्रो. नागेश्वर राव जी तथा दीक्षांत वक्ता के रूप में हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा जी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू जी तथा छत्तीसगढ़ शासन के माननीय उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव जी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। इसके अतिरिक्त पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, बिलासपुर के माननीय कुलपति प्रो. वीरेंद्र कुमार सारस्वत जी एवं कुलसचिव श्री चंद्रभूषण मिश्र जी सहित अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह की शोभा बढ़ाई।

इस गरिमामय दीक्षांत समारोह में श्री बसंत कुमार साहू द्वारा एम.ए. शिक्षा विषय में गोल्ड मेडल प्राप्त करना उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता, लगन और परिश्रम का सम्मान है। एक ओर वे विद्यालय में शिक्षकीय दायित्वों का निर्वहन कर विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में योगदान दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्वयं अध्ययन करके अपनी शैक्षणिक योग्यता एवं ज्ञान को निरंतर समृद्ध कर रहे हैं।

श्री साहू की यह उपलब्धि विशेष रूप से उन शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो कार्य की व्यस्तताओं के कारण आगे की पढ़ाई को कठिन मानते हैं। उन्होंने अपने प्रयासों से यह संदेश दिया है कि सीखने की ललक और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो जिम्मेदारियों के साथ भी उत्कृष्ट सफलता प्राप्त की जा सकती है।

उनकी सफलता विद्यार्थियों, युवाओं एवं शिक्षक समुदाय को आजीवन सीखते रहने, अपने ज्ञान को अद्यतन करने तथा निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा देती है। यह उपलब्धि शिक्षा के क्षेत्र में आत्मविकास, सकारात्मक सोच और सतत अध्ययन के महत्व को भी रेखांकित करती है।

श्री बसंत कुमार साहू की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर विद्यालय परिवार, सहकर्मियों, शुभचिंतकों एवं क्षेत्रवासियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं।

*श्री बसंत कुमार साहू की सफलता का संदेश है—उम्र कभी भी सीखने और आगे बढ़ने में बाधा नहीं होती। दृढ़ संकल्प, निरंतर अध्ययन और कठिन परिश्रम से हर उम्र में सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए जा सकते हैं।

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