उल्लास नवभारत साक्षरता पखवाड़ा अंतर्गत वाचन दिवस का आयोजन (उल्लास साक्षरता पखवाड़ा वाचन दिवस पर बच्चों में दिखा उत्साह)

उल्लास नवभारत साक्षरता पखवाड़ा अंतर्गत वाचन दिवस का आयोजन (उल्लास साक्षरता पखवाड़ा वाचन दिवस पर बच्चों में दिखा उत्साह)
भूपेंद्र साहू की रिपोर्ट। उल्लास नवभारत साक्षरता पखवाड़ा कार्यक्रम गतिविधि अंतर्गत 10/06/2026 को विकास खंड बम्हनीडीह के विभिन्न स्कूलों में बच्चों का अलग ही उत्साह देखने को मिला।ग्राम सेमरिया (बम्हनीडीह) के कक्षा आठवीं छात्र देवप्रकाश की दादी खीकबाई ने “बघवा आऊ कोलिहा” की कहानी को रोचक तरीके से अपने नाती को बताकर उत्साह बढ़ाया।देवप्रकाश ने भी अपने दादी को “मगरमच्छ और बंदर” की कहानी को सुनाते हुए दोनों उत्साह से भर गये।दादी और नाती ने एक दूसरे को समझने और आगे बढ़ने में सहयोग करते नजर आए। इससे सहयोगात्मक अधिगम का वातावरण बना।साथ ही विकास खंड बम्हनीडीह के विभिन्न स्कूलों में बच्चों ने उत्साह के साथ वाचन दिवस पर पठन किया।विकास खंड शिक्षा अधिकारी बसंत चतुर्वेदी ने कहा कि दादी-नानी की कहानियां हमारे भारतीय संस्कृति धरोहर बाल मन के विकास और संस्कारों का सबसे खूबसूरत जरिया है यह कहानी केवल मनोरंजन का साधन नहीं है बल्कि बच्चों के मानसिक और नैतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका सिखाती है।राजा-रानी,परियों पंचतंत्र और जातक कथाओं के माध्यम से बच्चों को ईमानदारी दया साहस और परोपकार जैसे बुनियादी बातें सहजता से समझ में आ जाती है।
बीआरसी एच के बेहार ने बताया कि कहानियां सुनते हुए बच्चे अपने मन में एक अलग दुनिया रचते हैं जिससे उनकी रचनात्मक बढ़ती है और नए शब्दों के प्रयोग से उनके भाषा मजबूत होती है।
कहानी सुनने का यह समय बच्चों और बुजुर्गों के बीच प्रेम आत्मीयता और विश्वास का एक मजबूत बंधन बनाता है।
विकास खंड परियोजना अधिकारी साक्षर भारत डॉ उमेश कुमार दुबे ने कहा कि इन कहानियों के माध्यम से बच्चे अपनी लोक संस्कृति परंपराओं और मातृभाषा के समृद्ध शब्दों से सहायता से जुड़ते हैं आज के डिजिटल युग में जहां बच्चे मोबाइल और टीवी स्क्रीन में व्यस्त हैं दादी-नानी के कहानियों की परंपरा धीरे-धीरे कम हो रही है।इस धरोहर को बचाए रखने के लिए बच्चों को किताबों और बुजुर्गों के साथ समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करना बेहद जरूरी है ।




