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चार साल से कर रहे देखभाल; अनार, नींबू और चीकू के पौधे शामिल

चित्तौड़गढ़ जिले के भदेसर पंचायत समिति क्षेत्र के कन्नौज गांव में चार साल पहले जिस 70 बीघा पहाड़ी इलाके में अतिक्रमण और सूखी जमीन थी, वहां अब हजारों पौधे लहलहा रहे हैं। पंचायत, प्रशासन और ग्रामीणों की भागीदारी से शुरू हुए इस अभियान के तहत करीब 13 से 14 हजार फलदार और छायादार पौधे लगाए गए हैं। इलाके में जल संरक्षण, तारबंदी, सोलर ट्यूबवेल और रास्तों का भी विकास किया गया है। अब यह मॉडल हरियाली, पर्यावरण संरक्षण और पंचायत की भविष्य की आय का जरिया बनता जा रहा है।

अतिक्रमण हटाकर शुरू किया गया विकास कार्य

कन्नौज गांव के धामनीखेड़ा चारागाह क्षेत्र में पहले अतिक्रमण और झाड़ियां थीं। पंचायत समिति भदेसर के सहायक अभियंता कन्हैया लाल थाकड़ ने बताया कि पंचायत की मदद से सबसे पहले अतिक्रमण हटाया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और वाटरशेड योजना के तहत पूरे इलाके के विकास का काम शुरू हुआ

उन्होंने बताया कि करीब 1545 रनिंग मीटर की तारबंदी की गई ताकि पौधों को सुरक्षित रखा जा सके। इसके बाद पूरे इलाके की सफाई कर पौधारोपण शुरू किया गया।

खास बात यह है कि इस काम में सिर्फ प्रशासन और पंचायत समिति ही नहीं बल्कि गांव के लोग भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। ग्रामीण समय-समय पर यहां पहुंचकर पौधों की देखभाल करते हैं और उन्हें बचाने का काम करते हैं। इसी वजह से चार साल पहले शुरू हुआ यह अभियान अब सफलता की मिसाल बनता जा रहा है।

5×5 मीटर दूरी पर लगाए गए फलदार पौधे

एक चौकीदार के रहने के लिए झोपड़ी भी बनाई गई। उन्होंने बताया कि 5×5 मीटर दूरी पर पौधे लगाए गए, जिनमें फलदार पौधों को ज्यादा महत्व दिया गया। यहां करीब 15 से 20 तरह के फलदार पौधे लगाए गए हैं, जिनमें अनार, नींबू, चीकू सहित कई किस्में शामिल हैं। इसके साथ ही छायादार पौधे भी लगाए गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि आने वाले समय में यह क्षेत्र पर्यावरण संतुलन मजबूत करने के साथ भूजल स्तर सुधार और मिट्टी संरक्षण में भी मदद करेगा।

चार साल पहले शुरू हुआ पौधारोपण अभियान

ग्राम पंचायत द्वारा करीब चार साल पहले इस पहाड़ी इलाके में बड़े स्तर पर पौधारोपण का काम शुरू किया गया था। लगभग 70 बीघा क्षेत्र में हजारों पौधे लगाए गए। यहां 20 से ज्यादा किस्मों के फलदार और छायादार पौधे लगाए गए हैं। इनमें अनार, नींबू, चीकू सहित कई स्थानीय किस्मों के पौधे शामिल हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि आने वाले समय में ये पौधे पर्यावरण संतुलन मजबूत करेंगे और गांव का हरित क्षेत्र बढ़ाएंगे। साथ ही इससे मिट्टी संरक्षण, वर्षा जल संचयन और भूजल स्तर सुधार में भी मदद मिलेगी। गांव के लोगों को भी पौधों की देखभाल के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है।

कन्हैया लाल थाकड़ ने बताया कैसे बदली पहाड़ी की तस्वीर

पंचायत समिति भदेसर के सहायक अभियंता कन्हैया लाल थाकड़ ने बताया कि धामनीखेड़ा चारागाह क्षेत्र में पहले अतिक्रमण था। पंचायत की मदद से सबसे पहले अतिक्रमण हटाया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और वाटरशेड योजना के तहत पूरे इलाके का विकास शुरू किया गया।

उन्होंने बताया कि सबसे पहले करीब 1545 रनिंग मीटर की तारबंदी की गई ताकि पौधों को सुरक्षित रखा जा सके। इसके बाद पूरे इलाके की सफाई करवाई गई और फिर पौधारोपण शुरू किया गया। यहां 7 हॉर्स पावर का सोलर ट्यूबवेल लगाया गया ताकि पौधों को समय पर पानी मिल सके।

कन्हैया लाल थाकड़ ने बताया कि पूरे इलाके में आने-जाने के लिए रास्ते बनाए गए और ग्रेवल रोड भी तैयार की गई। रास्तों के किनारे छायादार पौधे लगाए गए ताकि भविष्य में यह पूरा इलाका हराभरा दिखाई दे।

उन्होंने बताया कि इस पूरे काम पर करीब 35 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। अभी नरेगा योजना के तहत पौधों की देखभाल, निराई-गुड़ाई और रखरखाव का काम लगातार चल रहा है। चौकीदार की मदद से पूरे क्षेत्र की निगरानी भी की जा रही है।

गिरधारी लाल बोले- पहले यहां सिर्फ जंगल और अतिक्रमण था

ग्राम पंचायत कन्नौज के सरपंच प्रतिनिधि गिरधारी लाल ने बताया कि पहले यह पूरा इलाका जंगल जैसा था और यहां अतिक्रमण भी था। जब वाटरशेड योजना के तहत प्रोजेक्ट मंजूर हुआ तब सबसे पहले अतिक्रमण हटाने का काम किया गया।

उन्होंने बताया कि नारगढ़ पंचायत के लोगों का अतिक्रमण हटाने में करीब पांच से छह महीने लग गए। इसके बाद तारबंदी करवाई गई और पहाड़ी जमीन होने के कारण एक-एक मीटर के गड्ढे खोदकर मिट्टी बदली गई। फिर बड़े स्तर पर पौधारोपण किया गया।

गिरधारी लाल ने बताया कि यहां करीब 13 से 14 हजार पौधे लगाए गए हैं। इनमें वन विभाग के पौधों के साथ-साथ 15 से 20 तरह के फलदार पौधे भी लगाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि गांव के लोगों ने इस काम में पूरा सहयोग दिया। जब पौधारोपण शुरू हुआ था तब गांव के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे थे और सभी ने मिलकर पौधे लगाए थे। आज भी ग्रामीण समय-समय पर यहां आते हैं और पौधों की देखभाल करते हैं।

हरियालो राजस्थान अभियान से भी मिला सहयोग

गिरधारी लाल ने बताया कि शुरुआत में इस योजना के लिए वाटरशेड योजना से फंड मिला था। बाद में जब कुछ पौधे खराब हो गए तो पंचायत की ओर से नए पौधे लगाए गए। इसके अलावा चित्तौड़गढ़ जिले में चले हरियालो राजस्थान अभियान के दौरान भी यहां पौधे लगाए गए।

उन्होंने बताया कि इलाके में सोलर ऊर्जा से चलने वाला ट्यूबवेल लगाया गया है। इसके अलावा पंचायत की ओर से भी दो ट्यूबवेल लगाए गए। तत्कालीन जिला प्रमुख सुरेश धाकड़ ने यहां पानी की टंकी उपलब्ध करवाई थी जबकि जिला परिषद की ओर से एक ट्यूबवेल दिया गया था।

इसी वजह से यहां पानी की व्यवस्था लगातार बनी हुई है और पौधों की सिंचाई समय पर हो रही है।

उन्होंने बताया कि करीब 13.65 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण और तारबंदी का काम किया गया है। अच्छी पानी व्यवस्था होने के कारण पौधे तेजी से बढ़ रहे हैं और पूरा क्षेत्र हरियाली से भरता जा रहा है।

धामनी माता स्थान से जुड़ी है गांव की आस्था

इस इलाके में धामनी माता का स्थान भी मौजूद है, जिसे लोग जल की देवी मानते हैं। ग्रामीणों के अनुसार जब इलाके में बारिश नहीं होती तो आसपास की तीन पंचायतों और 10 से 12 गांवों के लोग यहां मन्नत मांगने आते हैं।

अब हरियाली बढ़ने के बाद यह जगह और ज्यादा सुंदर दिखाई देने लगी है। यहां आने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ रही है।

अब हरियाली के साथ पंचायत को होगी कमाई

सरपंच प्रतिनिधि का कहना है कि आने वाले समय में यहां लगे फलदार पौधों से फल मिलना शुरू हो जाएंगे। इसके बाद फलों की नीलामी की जाएगी, जिससे पंचायत को आमदनी होगी। फिलहाल यहां उग रहे चारे को बेचा जा रहा है।

गांव के लोगों का कहना है कि जिस जमीन पर पहले अतिक्रमण था, आज वही जमीन गांव के लिए हरियाली, पर्यावरण और कमाई का बड़ा जरिया बन चुकी है। कन्नौज गांव का यह मॉडल अब दूसरे गांवों के लिए भी मिसाल बनता जा रहा है।

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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