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चीन साथ तो बांग्‍लादेश भी दोस्‍त, चंद महीनों में भारत ने कैसे पलट दी बाजी, 89 कनेक्‍शन भी खास

आख‍िर हुआ क्या? दिल्ली में AI Impact Summit हुई. इसके बाद जो डेक्‍लेरशन जारी क‍िया गया, उस पर दुनिया के 89 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के हस्ताक्षर थे. इसमें चीन है तो बांग्‍लादेश भी… 89 देशों का एक मंच पर आना और भारत के नेतृत्व को स्वीकार करना यह बताता है कि आज वैश्विक मंच पर भारत का कद क्या है.

भारत का व‍िजन आया सबको पसंद

अमेरिका- यूरोप हमेशा से तकनीक को अपनी बपौती मानते आए हैं. उनका मानना रहा है कि जो तकनीक बनाएगा, वही उसका मालिक होगा और मुनाफा कमाएगा. लेकिन भारत ने दुनिया के सामने एक अलग विजन रखा- AI for All यानी सबके लिए AI. भारत ने साफ कर दिया कि AI सिर्फ कुछ अमीर देशों या बड़ी टेक कंपनियों का एकाधिकार नहीं हो सकता. इसका फायदा दुनिया के हर इंसान को मिलना चाहिए. इसी मंत्र ने अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, और एशिया के उन तमाम देशों का दिल जीत लिया, जिन्हें डर था कि AI की रेस में वे कहीं पीछे न छूट जाएं.

ड्रैगन का क्‍यों बदला मिजाज?

सबसे दिलचस्प चीन का रुख. जो चीन अमूमन भारत के हर अंतरराष्ट्रीय प्रयास में अड़ंगा लगाता है. चाहे वह यूएन की परमानेंट मेंबरश‍िप हो या संयुक्त राष्ट्र में किसी आतंकी को बैन करने का मुद्दा, वही चीन AI के मुद्दे पर भारत के साथ एक ही मंच पर खड़ा है. ऐसा क्यों?

CPEC और पाकिस्तान का मोहभंग: चीन ने अपनी अति-महत्वाकांक्षी योजना के तहत पाकिस्तान में जो करोड़ों डॉलर का निवेश किया था, जिसे CPEC या चीन-पाक आर्थिक गलियारा कहा जाता है, उसका काम चीन ने लगभग रोक दिया है. पाकिस्तान में चीनी इंजीनियरों पर हो रहे आतंकी हमले और पाकिस्तान की कंगाली ने चीन को यह समझा दिया है कि एक फर्जी और असफल देश के कंधे पर बंदूक रखकर वह एशिया का चौधरी नहीं बन सकता.

तकनीक में अलग-थलग पड़ने का डर: अमेरिका और यूरोप पहले ही चाइनीज AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगा चुके हैं. चीन जानता है कि अगर वह भारत की अगुवाई वाले इस ‘Global AI 88’ से बाहर रहा, तो वह दुनिया की भविष्य की तकनीक की मुख्यधारा से कट जाएगा.

भारत की मजबूत इकॉनमी का लोहा: चीन एक व्यापारी देश है. वह उसी की इज्जत करता है जिसके पास पैसा और बाजार है. आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है. चीन को समझ आ गया है कि भारत से अड़कर या उसे नजरअंदाज करके वह ग्लोबल सप्लाई चेन में अपनी गिरती साख को नहीं बचा सकता.

बांग्लादेश का साथ, भारत की बड़ी जीत

इस घोषणा-पत्र का समर्थन करने वालों में बांग्लादेश का नाम आना भारत के लिए कूटनीतिक रूप से बहुत मायने रखता है. आपको याद होगा कि पिछले कुछ समय से बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल रही है. कई बार ऐसी रिपोर्ट्स भी आईं कि वहां की सियासत में कुछ भारत-विरोधी सुर उठ रहे हैं या विदेशी ताकतें जैसे चीन या अमेरिका वहां अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं. लेकिन, जब बात भविष्य की आई, जब बात ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ के विकास और अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने की आई, तो बांग्लादेश को समझ आ गया कि उसका सच्चा और भरोसेमंद साथी नई दिल्ली ही है.

बांग्लादेश के समर्थन के मायने

यह दिखाता है कि दक्षिण एशिया में भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ (पड़ोसी प्रथम) नीति मजबूती से काम कर रही है. बांग्लादेश जानता है कि अगर उसे अपने युवाओं को नौकरियां देनी हैं और एक आधुनिक इकॉनमी बनना है, तो उसे भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे UPI और AI फ्रेमवर्क का हिस्सा बनना ही होगा. भारत का विजन ऐसा है, जो छोटे देशों की सॉवरेन‍िटी का सम्मान करता है. बांग्‍लादेश को यह बात समझ आ रही है.

दुनिया भारत के पीछे क्यों खड़ी हो गई?

आप सोच रहे होंगे कि अचानक 89 देश भारत के बनाए इस डिक्लेरेशन पर राजी कैसे हो गए? इसका जवाब भारत की उस छवि में छिपा है, जो उसने पिछले 10 सालों में गढ़ी है.

भरोसेमंद पार्टनर : दुनिया जानती है कि भारत तकनीक का इस्तेमाल किसी को डराने या किसी देश का डाटा चुराने के लिए नहीं करता जैसा आरोप चीन पर लगता है). भारत ‘ट्रस्टेड और रेजिलिएंट यानी भरोसेमंद और लचीले AI स‍िस्‍टम की बात कर रहा है.डिजिटल इंडिया की सफलता: दुनिया ने देखा है कि कैसे भारत ने आधार, UPI, और कोविन (CoWIN) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से अपने 140 करोड़ लोगों की जिंदगी बदली है. भारत ने तकनीक को अमीरों के गैजेट से निकालकर ठेले वाले के क्यूआर (QR) कोड तक पहुंचा दिया है. जब भारत कहता है कि हम AI को भी आम आदमी के लिए सुलभ बनाएंगे, तो दुनिया उस पर विश्वास करती है.ग्लोबल साउथ की आवाज: भारत ने खुद को ग्लोबल साउथ के सबसे मजबूत नेता के रूप में स्थापित कर लिया है. जब AI के नियम बनाने की बात आई, तो भारत ने इन गरीब देशों से कहा कि डरो मत, तुम्हारे हकों की लड़ाई हम लड़ेंगे. यही वजह है कि आज इतने सारे देश भारत के पीछे लामबंद हैं

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