बच्चों में पढ़ने की रुचि विकसित करने और विद्यालयों में पठन संस्कृति को बढ़ावा देने पर दिया गया जोर’

जीवंत पुस्तकालय उन्मुखीकरण प्रशिक्षण में 122 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा’
’बच्चों में पढ़ने की रुचि विकसित करने और विद्यालयों में पठन संस्कृति को बढ़ावा देने पर दिया गया जोर’
अक्टूबर 2026//’ कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में जिला पंचायत सभाकक्ष में जीवंत पुस्तकालय उन्मुखीकरण का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जनजातीय कार्य विभाग एवं शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रशिक्षण में कुल 122 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों एवं शिक्षा दूतों को पुस्तकालय के प्रभावी संचालन तथा बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए आवश्यक जानकारी और व्यावहारिक रणनीतियों से अवगत कराना था।
प्रशिक्षण के दौरान सहयोगी संस्था शिक्षार्थ ट्रस्ट के प्रतिनिधियों ने जीवंत पुस्तकालय की अवधारणा, उसके विभिन्न आयामों, प्रभावी संचालन और बच्चों तक पुस्तकों की सहज पहुंच सुनिश्चित करने के तरीकों की जानकारी दी। प्रतिभागियों को बताया गया कि पुस्तकालय केवल पुस्तकों को रखने का स्थान नहीं है, बल्कि यह बच्चों में पढ़ने की रुचि, कल्पनाशीलता, भाषा कौशल और सीखने की जिज्ञासा विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
इस पहल के तहत जिला प्रशासन नारायणपुर को प्रथम बुक्स द्वारा दान स्वरूप हैंगिंग लाइब्रेरी प्राप्त हुई हैं। इन पुस्तकालयों के माध्यम से बच्चों को उनकी पहुंच में रोचक एवं गुणवत्तापूर्ण पुस्तकें उपलब्ध कराने और विद्यालयों में पठन संस्कृति को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पीपीआईए फेलो राहुल भी उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण के दूसरे दिन आयोजित समापन सत्र में कलेक्टर नम्रता जैन, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत नारायणपुर तथा जिला शिक्षा अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर कलेक्टर ने बच्चों के सीखने में कहानी और कहानी सुनने की प्रक्रिया के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने शिक्षकों को बच्चों के साथ नियमित रूप से कहानी आधारित गतिविधियां आयोजित करने, उनमें पुस्तकों के प्रति रुचि विकसित करने तथा पुस्तकालयों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालिका अधिकारी चित्रकांत चाली ठाकुर, जिला शिक्षा अधिकारी महेंद्र नाथ पांडे सहित शिक्षक गण उपस्थित थे।



