जांजगीर-चांपा। सरकारी योजनाएं लोगों का जीवन आसान बनाने के लिए बनती हैं, लेकिन जब उन्हीं योजनाओं की रकम पर कथित फर्जीवाड़े के आरोप लगने लगें तो सवाल सिर्फ पैसों का नहीं, पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता का होता है। जांजगीर जिला चिकित्सालय में परिवार नियोजन प्रोत्साहन राशि के नाम पर ₹8.80 लाख के कथित फर्जी भुगतान का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक हलचल तेज हो गई है। संबंधित बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया है, राज्य स्तर पर 5 सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है और अब कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने भी मामले की जांच अपर कलेक्टर को सौंपते हुए सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
कथित फर्जी भुगतान का आरोप, रिकॉर्ड खंगाले जा रहे
जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल में परिवार नियोजन ऑपरेशन के लाभार्थियों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के वितरण में गंभीर अनियमितता की शिकायत सामने आई है। आरोप है कि वास्तविक हितग्राहियों तक राशि पहुंचने के बजाय फर्जी दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर ₹8.80 लाख का भुगतान दर्शाया गया। प्रारंभिक जांच में अस्पताल के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदेह के घेरे में मानी जा रही है।
खाता फ्रीज, जनवरी 2023 से फरवरी 2026 तक के रिकॉर्ड की जांच
मामला सामने आते ही वर्तमान सिविल सर्जन ने संबंधित बैंक खाते को फ्रीज करा दिया। स्वास्थ्य विभाग ने 5 सदस्यीय जांच समिति गठित कर जनवरी 2023 से फरवरी 2026 तक के सभी अभिलेख, दस्तावेज और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच शुरू कर दी है। समिति यह पता लगाएगी कि भुगतान किन खातों में गया और पूरी प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका रही।
कलेक्टर का बड़ा एक्शन, अब अपर कलेक्टर करेंगे जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने भी जिला चिकित्सालय में परिवार नियोजन प्रोत्साहन राशि के वितरण और जीवनदीप समिति के अंतर्गत हुई नियुक्तियों से संबंधित शिकायतों की जांच अपर कलेक्टर को सौंप दी है। उन्होंने सभी अभिलेखों और दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, 27 जुलाई 2026 को सुबह 10:30 बजे राज्य स्तरीय जांच समिति भी जांजगीर पहुंचकर पूरे मामले की जांच करेगी।
पूर्व सिविल सर्जन समेत कई नामों पर उठे सवाल
मामले में पूर्व सिविल सर्जन डॉ. एस. कुजूर, डॉ. दीपक जायसवाल और अस्पताल सलाहकार अंकित ताम्रकार के नाम भी आरोपों के दायरे में आए हैं। आरोप है कि परिवार नियोजन प्रोत्साहन राशि वितरण प्रक्रिया का कथित दुरुपयोग कर फर्जी भुगतान किए गए। हालांकि, अभी तक किसी भी अधिकारी की भूमिका आधिकारिक रूप से तय नहीं हुई है और पूरा मामला जांच के अधीन है।
विधानसभा तक पहुंचा मामला
इस कथित फर्जीवाड़े की गूंज विधानसभा तक पहुंच चुकी है। जांजगीर-चांपा विधायक व्यास कश्यप ने विधानसभा में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं की राशि में गड़बड़ी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
भृत्य के खाते से ₹8.56 लाख के लेनदेन ने बढ़ाए सवाल
जांच के दौरान जिला अस्पताल के एक भृत्य के बैंक खाते से ₹8.56 लाख के लेनदेन का मामला भी सामने आया है। संबंधित कर्मचारी ने अपने खाते के उपयोग की जानकारी होने से इनकार किया है। अब जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, हस्ताक्षर और डिजिटल ट्रांजेक्शन के जरिए यह पता लगाने में जुटी हैं कि राशि आखिर किसके पास पहुंची।
अब नजर जांच पर
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी या फिर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग में शामिल हर जिम्मेदार व्यक्ति तक कार्रवाई पहुंचेगी। फिलहाल पूरा जिला 27 जुलाई को होने वाली राज्य स्तरीय जांच और उसके बाद आने वाली रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।


