एक ही खेत में मछली, मुर्गी, बकरी पालन और बीसियों तरह की सब्जियों की खेती, सोलर पंप-ड्रिप इरिगेशन भी, सब पर सब्सिडी

रांची. झारखंड पशुपालन विभाग की तरफ से एक मॉडल तैयार किया गया है. इस मॉडल के तहत जिनके पास कम से कम एक एकड़ जमीन है, वे इस मॉडल को अपना सकते हैं. इसमें बकरी, मुर्गी, बत्तख, मछली पालन, साथ में बैंगन, टमाटर, आलू, मशरूम, अमरूद जैसी चीजों की खेती कर सकते हैं. इसके लिए अलग-अलग ब्लॉक बनेंगे और खास बात यह है कि खेत में सोलर पंप भी लगेगा.
इससे किसानों को बिजली बिल भी नहीं भरना पड़ेगा और इसी से वे सिंचाई भी कर लेंगे. ड्रिप इरिगेशन के जरिए पानी की खपत कम होगी और पशुओं का जितना भी वेस्ट होगा, वह सब खेत में खाद का काम करेगा. कृषि पदाधिकारी ओपी गुप्ता बताते हैं कि इसे इंटीग्रेटेड फार्मिंग भी कहते हैं और इसमें किसानों को कभी भी एक चीज पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. उनके पास विकल्पों की कमी नहीं रहेगी.
आम से लेकर अमरूद तक के पेड़
इसमें किसानों को आम से लेकर अमरूद तक के पेड़ देखने को मिलेंगे. खेत के किनारे-किनारे इस तरह के फलदार पेड़ लगाए जा सकते हैं. कटहल का पेड़, पपीता, इन सारी चीजों की बाजार में काफी अच्छी डिमांड होती है. इसके अलावा ड्रिप इरिगेशन की मशीन उनके खेत में लगा दी जाएगी और इन सब पर उनको सब्सिडी भी मिलेगी. 90 प्रतिशत तक सब्सिडी के बाद यह मात्र 6,000 रुपये में मिल
पानी पटाने के लिए मोटर
इसके साथ ही मोटर भी चलाएंगे पानी पटाने के लिए. इसमें भी सोलर पैनल के जरिए बिजली की खपत होगी. ऐसे में सिंचाई को लेकर उनकी जो बहुत बड़ी टेंशन होती है, वह भी खत्म होगा. इस मॉडल में खेत में अलग-अलग क्यारियां होती हैं. एक क्यारी में टमाटर लगेगा, तो एक में बैंगन, एक में भिंडी, तो एक में आलू. इस तरीके से अलग-अलग चीजें एक ही जगह करने से उनके पास वैरायटी की कमी नहीं रहेगी और बाजार में जिस तरह की भी डिमांड होगी, उसकी पूर्ति वे कर पाएंगे.इसके लिए ले सकते हैं किसान ट्रेनिंग
इसके लिए इच्छुक किसान ट्रेनिंग भी ले सकते हैं, जो बिल्कुल निशुल्क होती है. यह चार दिनों की ट्रेनिंग है, जो आप अपने नजदीकी कृषि विभाग में जाकर कर सकते हैं. यहां पर आपको इंटीग्रेटेड फार्मिंग की एबीसीडी बतायी जाएगी. इतना ही नहीं, वहीं से आपको सोलर पैनल, ड्रिप इरिगेशन व बीज जैसी चीजों पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी भी मिलेगी



