भारत का वह राज्य, जिसे कहते हैं ‘सात बहनों का इकलौता भाई

भारत में आपने अलग-अलग राज्यों के बारे में सुना या पढ़ा होगा। इनमें पूर्वोत्तर के 7 राज्य ऐसे हैं, जिन्हें सात बहनें कहा जाता है। इस कड़ी में यहां एक राज्य ऐसा भी है, जिसे उन 7 बहनों का भाई कहा जाता है। कौन-सा है यह राज्य, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें। भारत को विविधताओं का देश कहा जाता है। यहां आपने अलग-अलग राज्यों के बारे में पढ़ा और सुना होगा, जिनमें 7 राज्य ऐसे हैं, जिन्हें सात बहनें कहा जाता है। ये राज्य अपनी अनूठी विशेषताओं के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, इनके पास ही एक राज्य ऐसा भी है, जिसे इन सात बहनों का इकलौता भाई भी कहा जाता है। कौन-सा है यह राज्य, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
किन राज्यों को कहा जाता है 7 बहनें
भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को उसकी प्राकृतिक छटा, सांस्कृतिक विविधता और रणनीतिक अहमियत के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र में मुख्य रूप से सात राज्य अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा शामिल हैं। इन सातों राज्यों को आपस में गहरे भौगोलिक और सांस्कृतिक जुड़ाव के कारण ‘सेवन सिस्टर्स’ (सात बहनें) कहा जाता है।
किस राज्य को कहते हैं इकलौता भाई
अब सवाल है कि किस राज्य को इन सात बहनों का इकलौता भाई कहते हैं, तो आपको बता दें कि सिक्किम राज्य ऐसा है, जिसे इन 7 बहनों का इकलौता भाई कहते हैं।
सिक्किम को क्यों कहते हैं भाई
सिक्किम को भाई कहने का सबसे बड़ा कारण इसकी अनूठी भौगोलिक स्थिति है। सिक्किम इन सात बहनों के साथ अपनी सीमा साझा नहीं करता है। पश्चिम बंगाल का 22 किलोमीटर चौड़ा सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे ‘चिकन्स नेक’ (Chicken’s Neck) भी कहा जाता है, सिक्किम को बाकी पूर्वोत्तर राज्यों से अलग करता है। यह एक ऐसे भाई की तरह है, जो अपनी सात बहनों से थोड़ी दूरी पर बसा है, लेकिन उस पूरे पूर्वोत्तर परिवार का एक अहम हिस्सा है।
सिक्किम का राजनीतिक विलय
ऐतिहासिक रूप से सिक्किम की कहानी अन्य पूर्वोत्तर राज्यों से बिल्कुल अलग रही है। भारत की आजादी के समय ‘सेवन सिस्टर्स’ वाले क्षेत्र भारत का हिस्सा थे, लेकिन सिक्किम चोग्याल वंश के अधीन था। साल 1975 में एक ऐतिहासिक जनमत संग्रह के बाद सिक्किम औपचारिक रूप से भारत का 22वां राज्य बना। सिक्किम के विकास और पूर्वोत्तर के साथ इसके स्वाभाविक मेल को देखते हुए साल 2002 में इसे ‘उत्तर पूर्वी परिषद’ का आठवां सदस्य बनाया गया। इस परिषद में शामिल होने के बाद ही इसे अधिकारिक रूप से ‘सात बहनों के भाई’ की उपाधि मिली



