छत्तीसगढ़

धान में सफेद माहू के प्रकोप से बचाव हेतु किसानों को सलाह

धान में सफेद माहू के प्रकोप से बचाव हेतु किसानों को सलाह

नारायणपुर, 23 सितंबर 2026// जिले में इन दिनों धान की फसल में विभिन्न कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है। कुछ क्षेत्रों में धान की फसल में सफेद माहू का प्रकोप भी दिखाई दे रहा है। इसका वैज्ञानिक नाम सोगाटेला फुर्सिफेरा है। कृषि विज्ञान केंद्र, नारायणपुर द्वारा किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने तथा कीट का प्रकोप दिखाई देने पर समय पर उचित प्रबंधन उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। सफेद माहू का प्रकोप विशेष रूप से धान की रोपाई के बाद लगातार खड़े पानी, अधिक मात्रा में नत्रजनयुक्त उर्वरकों के उपयोग तथा अधिक सघन फसल से बढ़ सकता है। गर्म तापमान, अधिक आर्द्रता के साथ बादल छाए रहने की स्थिति अथवा लंबे समय तक तेज धूप रहने पर भी सफेद माहू की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। इसके शिशु एवं वयस्क मुख्य रूप से पौधे के तने के ऊपरी भाग, विशेषकर पत्ती और तने के जोड़ के आसपास पाए जाते हैं। ये पौधों का रस चूसकर नुकसान पहुंचाते हैं तथा इस दौरान चिपचिपा मधुरस भी उत्सर्जित करते हैं।

मधुरस के कारण पत्तियों की सतह पर काली कालिख जैसी फफूंद (सूटी मोल्ड) विकसित हो सकती है। इससे पत्तियों पर प्रकाश के अवशोषण की क्षमता प्रभावित होती है और प्रकाश संश्लेषण कम होने के कारण पौधों की वृद्धि एवं उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अधिक प्रकोप की स्थिति में धान की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं तथा बाद में ‘हॉपर बर्न’ के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। खेत में अनियमित एवं अलग-अलग पैच में पौधों का सूखना भी सफेद माहू के अधिक प्रकोप का संकेत हो सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र, नारायणपुर द्वारा किसानों को सलाह दी गई है कि वे धान के खेतों की नियमित निगरानी करें तथा पत्ती और तने के जोड़ के आसपास सफेद माहू की उपस्थिति पर विशेष ध्यान दें। नत्रजनयुक्त उर्वरकों का संतुलित मात्रा में उपयोग करें और आवश्यकता से अधिक नत्रजन का प्रयोग करने से बचें।

प्रारंभिक अवस्था में सफेद माहू के प्रबंधन के लिए नीम तेल 3 प्रतिशत 15 लीटर प्रति हेक्टेयर अथवा नीम बीज गिरी अर्क 5 प्रतिशत 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर का उपयोग किया जा सकता है। धान के एक कल्ले (एक तने) पर अगर औसतन 2 सफेद माहू दिखाई दें, तो इसे आर्थिक नुकसान स्तर (म्ज्स्) माना जाता है और तत्काल नियंत्रण उपाय करना आवश्यक है। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा बताया गया है कि म्ज्स् से अधिक प्रकोप होने पर 200 लीटर पानी प्रति एकड़ में अनुशंसित कीटनाशक का घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है। इनमें पाइमेट्रोजिन 50 ॅळ 120 ग्राम प्रति एकड़, डाइनोटेफ्यूरान 20 ैळ 80 ग्राम प्रति एकड़ अथवा ऐसीटामिप्रिड 20 ैच् 60 ग्राम प्रति एकड़ का उपयोग अनुशंसा अनुसार किया जा सकता है।

किसानों को सलाह दी गई है कि एक समय में केवल एक ही अनुशंसित कीटनाशक का प्रयोग करें तथा अनावश्यक रूप से कीटनाशकों का छिड़काव न करें। कीटनाशक का उपयोग करते समय उत्पाद के लेबल पर दिए गए निर्देशों एवं सुरक्षा सावधानियों का अनिवार्य रूप से पालन करें। कृषि विज्ञान केंद्र, नारायणपुर ने किसानों से अपील की है कि फसल में सफेद माहू के लक्षण दिखाई देने पर नियमित निगरानी करें और आवश्यकता होने पर कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर ही नियंत्रण उपाय अपनाएं।

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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