चिरायु ने बदली बच्चों की जिंदगी, गंभीर बीमारियों को मिला मुफ्त इलाज

चिरायु ने बदली बच्चों की जिंदगी, गंभीर बीमारियों को मिला मुफ्त इलाज
समय पर पहचान, निःशुल्क इलाज… बच्चों को मिला स्वस्थ जीवन
3 साल में 60 बच्चों के हृदय रोग का उपचार, कटे-फटे होंठ-तालु समेत 90 बच्चों को मिला उपचार
कवर्धा, 22 सितंबर 2026। बीमारी गंभीर थी, लेकिन इलाज के रास्ते में पैसा बाधा नहीं बना। कवर्धा में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के जरिए जन्मजात और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों की समय पर पहचान कर उन्हें निःशुल्क उपचार दिलाया जा रहा है। पिछले तीन वर्षों में 60 बच्चों के हृदय रोग का सफल उपचार हुआ। इसके अलावा 21 बच्चों के कटे-फटे होंठ एवं तालु, 5 बच्चों के टेढ़े-मेढ़े पैर और 4 बच्चों की नवजात बधिरता का भी सफल उपचार कराया गया। नियमित स्वास्थ्य जांच से बीमारी की पहचान से लेकर उपचार तक की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग उठा रहा है।
सेवा संकल्प अभियान से स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के प्रयासों को भी गति मिल रही है। चिरायु दल स्कूलों, छात्रावासों, आश्रमों और आंगनबाड़ी केन्द्रों तक पहुंचकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं। जांच के दौरान किसी बच्चे में गंभीर बीमारी या जन्मजात विकृति के लक्षण मिलने पर उसे आगे की जांच और उपचार के लिए चिरायु वाहन के माध्यम से शासन से अनुबंधित अस्पतालों में भेजा जाता है। जरूरत पड़ने पर राज्य के बाहर स्थित अनुबंधित अस्पतालों में भी बच्चों का निःशुल्क उपचार कराया जाता है।
साल में तीन बार तक होती है बच्चों की स्वास्थ्य जांच
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले के शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों, अनुदान प्राप्त विद्यालयों, आवासीय विद्यालयों, आश्रम एवं छात्रावासों में अध्ययनरत बच्चों के साथ आंगनबाड़ी केन्द्रों में पंजीकृत 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जाती है। चिरायु दल में चिकित्सक, फार्मासिस्ट, लैब टेक्निशियन एवं एएनएम शामिल होते हैं। दल द्वारा विद्यालयों में वर्ष में एक बार तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों में वर्ष में दो बार पहुंचकर स्वास्थ्य जांच, परामर्श और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाता है।
बीमारी की पहचान से उपचार तक पूरी व्यवस्था
जांच के दौरान गंभीर बीमारी या जन्मजात विकृति की पहचान होने पर बच्चे को आवश्यक जांच एवं उपचार के लिए विशेषज्ञ अस्पताल भेजा जाता है। चिरायु वाहन के माध्यम से बच्चों को अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाती है। उपचार के लिए शासन द्वारा अनुबंधित शासकीय एवं निजी अस्पतालों का लाभ दिलाया जाता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अपने बच्चों के महंगे इलाज के लिए आर्थिक परेशानी नहीं उठानी पड़ती।
दूध पीते समय हांफना भी हो सकता है हृदय रोग का संकेत
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सलिल मिश्रा ने बताया कि छोटे बच्चों में हृदय रोग के कुछ लक्षण शुरुआती स्तर पर दिखाई दे सकते हैं। दूध पीने में परेशानी, स्तनपान या फीडिंग के दौरान जल्दी थक जाना अथवा हांफने लगना, दूध पीते या रोते समय अधिक पसीना आना, होंठ, जीभ या नाखूनों का नीला अथवा बैंगनी पड़ना, पर्याप्त भोजन के बावजूद वजन एवं शारीरिक विकास में अपेक्षित वृद्धि नहीं होना तथा आराम या नींद के दौरान भी तेज सांस चलना ऐसे प्रमुख संकेत हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अभिभावक लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से लें सलाह
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों में इस तरह के लक्षण दिखाई देने पर इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें। समय पर चिकित्सकीय परामर्श और जांच से बीमारी की जल्द पहचान संभव है और जरूरत के अनुसार उपचार कराया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि जिले के दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों तक भी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित हो।
समय पर जांच, बीमारी की शीघ्र पहचान और निःशुल्क उपचार के जरिए चिरायु कार्यक्रम जिले के बच्चों के स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव तैयार कर रहा है। जन्मजात एवं गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के लिए यह व्यवस्था न केवल उपचार का माध्यम बन रही है, बल्कि परिवारों को आर्थिक बोझ से बचाते हुए बच्चों को स्वस्थ और बेहतर जीवन की राह भी दे रही है।




