10 समूहों को 37 लाख रुपये का ऋण, स्वरोजगार से आत्मनिर्भर बन रही महिलाएं*

सफलता की कहानी*
*चक्रिय निधि से महिला स्व सहायता समूहों को मिला आर्थिक संबल*
*10 समूहों को 37 लाख रुपये का ऋण, स्वरोजगार से आत्मनिर्भर बन रही महिलाएं*
सितम्बर 2026// नारायणपुर एवं ओरछा विकासखण्ड की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में वन विभाग द्वारा महत्वपूर्ण पहल की गई है। शासन की मंशानुरूप महिला स्व सहायता समूहों को चक्रिय निधि के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराकर उन्हें विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इससे महिलाओं को रोजगार के स्थायी अवसर मिलने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रारंभिक रूप से घरेलू कार्यों तक सीमित रहने वाली महिलाओं में आत्मनिर्भर बनने की प्रबल इच्छा थी। इसी उत्साह को अवसर में बदलते हुए वन विभाग ने महिलाओं को स्व सहायता समूहों के माध्यम से संगठित कर रोजगारोन्मुखी गतिविधियों से जोड़ने की कार्ययोजना तैयार की। विशेषकर अबुझमाड़ क्षेत्र में नक्सलमुक्ति के बाद महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
इसी क्रम में वर्ष 2026-27 में कुल 10 महिला स्व सहायता समूहों को 37 लाख रुपये की चक्रिय निधि से ऋण प्रदान किया गया है। समूहों द्वारा फूलझाड़ू संग्रहण एवं प्रसंस्करण, इमली संग्रहण एवं प्रसंस्करण, दोना-पत्तल निर्माण के लिए माहुल पत्ता क्रय, कच्चे फूलझाड़ू का प्रसंस्करण, किराना स्टोर्स एवं कैंटीन संचालन, गृह उद्योग के माध्यम से मसाला निर्माण, लघु वनोपज संग्रहण एवं प्रसंस्करण तथा बेकरी सह किराना एवं कैंटीन संचालन जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। चक्रिय निधि का लाभ जगदम्बा महिला स्व सहायता समूह, जय वाला कारयो महिला स्व सहायता समूह, मां लक्ष्मी महिला स्व सहायता समूह, मां शीतला महिला स्व सहायता समूह, मां दंतेश्वरी महिला स्व सहायता समूह, मां दुर्गा महिला स्व सहायता समूह, मां सरस्वती महिला स्व सहायता समूह, जय बिहान महिला स्व सहायता समूह, मां अम्बे महिला स्व सहायता समूह एवं मां दुर्गा महिला स्व सहायता समूह को प्रदान किया गया है।
इस पहल से समूह की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। स्वरोजगार गतिविधियों के माध्यम से महिलाओं को नियमित आय प्राप्त होने लगी है, जिससे वे अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के साथ बच्चों की बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी ध्यान दे पा रही हैं। वन विभाग की यह पहल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी उदाहरण बन रही है। वित्तीय सहयोग, प्रशिक्षण और संसाधनों का समुचित अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं सफल उद्यमी बनकर न केवल अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत कर सकती हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित कर सकती हैं।



