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राजनीति में महिलाओं को मोहरा न बनाएं’, सीएम विजय की मां पर टिप्पणी को लेकर खुशबू सुंदर ने तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष को दी नसीहत

तमिलनाडु की पॉलिटिक्स में बयानबाजी का नया विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन की ओर से राज्य के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की मां को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर तमिलनाडु भाजपा की उपाध्यक्ष और अभिनेत्री से राजनेता बनी खुशबू सुंदर ने कड़ी नाराजगी जताई है।

राज्य भाजपा की उपाध्यक्ष खुशबू सुंदर ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, “किसी भी महिला या मां के सम्मान को राजनीतिक हमलों का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा ‘नारी शक्ति’ के सम्मान की बात करते हैं और ऐसे बयान उस भावना के खिलाफ हैं।”

खुशबू ने कहा, “मैंने हमेशा अपनी बात खुलकर रखी है और कभी भी किसी महिला के अपमान या उनकी गरिमा और सम्मान पर सवाल उठाने को बर्दाश्त नहीं किया है। यह सुनकर मुझे बहुत दुख और निराशा हुई है। उन्होंने कहा कि पार्टी से सवाल पूछिए, लोगों के लिए आवाज़ उठाइए, अगर सरकार काम न कर पाए तो उस पर हमला कीजिए, लेकिन अपनी बात कहने के लिए कभी भी किसी महिला का इस्तेमाल मत कीजिए। राजनीति के खेल में महिलाएं मोहरा नहीं होतीं।”उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों, पार्टी के हर सदस्य और हर पुरुष को किसी महिला का अपमान करने से पहले सोचना चाहिए। याद रखें, आप इस दुनिया में एक महिला और एक माँ की वजह से ही हैं। माँ का यह अपमान दुखद और पीड़ादायक है

तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साधते हुए ऐसी टिप्पणी की जिसे लेकर सियासी गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

दरअसल,  ने हाल ही में डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन पर तंज कसते हुए “तुम्हारे पिता कहां हैं” जैसी टिप्पणी की थी। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए नैनार नागेंद्रन ने विजय की मां को लेकर विवादित टिप्पणी कर दी। उनके बयान को विपक्षी दलों ने महिलाओं के सम्मान के खिलाफ और व्यक्तिगत स्तर पर हमला बताया है।

विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने इस बयान की कड़ी निंदा की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि एक प्रदेश अध्यक्ष से इस तरह की भाषा की उम्मीद नहीं की जाती। तमिलनाडु के स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन ने भी बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नागेंद्रन ने किसी जिम्मेदार नेता की तरह नहीं, बल्कि सड़क किनारे भाषण देने वाले व्यक्ति की तरह बात की है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में गरिमा और मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।

इस विवाद के बाद तमिलनाडु की राजनीति में व्यक्तिगत टिप्पणियों और राजनीतिक शिष्टाचार को लेकर बहस तेज हो गई है।

बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने क्या कहा?

तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने भी नैनार नागेंद्रन की टिप्पणी से दूरी बनाते हुए इसकी आलोचना की। अन्नामलाई ने कहा कि यह बयान राजनीतिक शालीनता और मर्यादा की सीमाओं को पार करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन किसी की मां या परिवार को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है। अन्नामलाई ने नेताओं से सार्वजनिक जीवन में संयमित भाषा का इस्तेमाल करने और राजनीतिक बहस को व्यक्तिगत हमलों से दूर रखने की अ

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अन्नामलाई ने लिखा, “तमिलनाडु की राजनीति में अभद्र और अशोभनीय बयानबाजी लगातार जारी रहना बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन के बाद अब तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने भी मुख्यमंत्री विजय की मां को लेकर टिप्पणी कर राजनीतिक शालीनता की सीमाएं लांघ दी हैं।”

अन्नामलाई ने कहा कि राजनीति में रहने वाले लोगों को अपने शब्दों और कार्यों के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए। मतभेद हो सकते हैं, नीतियों की आलोचना की जा सकती है और सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए जा सकते हैं, लेकिन किसी के परिवार, खासकर उसकी मां का अपमान करने वाली भाषा का इस्तेमाल किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विमर्श को व्यक्तिगत हमलों और पारिवारिक टिप्पणियों से दूर रखा जाना चाहिए।

अन्नामलाई ने अपने बयान में आगे कहा कि इस तरह की निम्नस्तरीय टिप्पणियां उस राजनीति की याद दिलाती हैं, जो 30-40 साल पहले ही अप्रासंगिक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि आज के तमिलनाडु के युवा और नई पीढ़ी के बच्चों को इस तरह की तीसरे दर्जे की राजनीति का संदेश नहीं दिया जाना चाहिए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक बहस मुद्दों, नीतियों और जनहित के सवालों पर होनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत आरोपों और परिवारों को निशाना बनाने वाली बयानबाजी पर। अन्नामलाई ने नेताओं से सार्वजनिक जीवन की गरिमा बनाए रखने और स्वस्थ राजनीतिक संस्कृति को बढ़ावा देने की अपील की

भाजपा नेता ने दी सफाई

विवाद बढ़ने के बाद तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने अपनी टिप्पणी पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और उनका किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने का कोई इरादा नहीं था।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा, “ओरु नाडु 2.0 पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में मंच से दिए गए मेरे भाषण को राजनीतिक लाभ के लिए गलत तरीके से पेश करने की कोशिश की जा रही है। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैंने किसी को निशाना बनाकर या किसी दुर्भावना के साथ कोई टिप्पणी नहीं की थी।”

नागेंद्रन ने आगे कहा, “मुझे मां, मातृभूमि और मातृभाषा तीनों के प्रति गहरा सम्मान और चिंता है।” उन्होंने दावा किया कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया है और इसे अनावश्यक रूप से विवाद का रूप दिया जा रहा है।

विजय बनाम उदयनिधि स्टालिन: कैसे बढ़ा विवाद?

तमिलनाडु की राजनीति में यह विवाद मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की उस टिप्पणी के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने डीएमके नेता एम.के. स्टालिन पर तंज कसते हुए पूछा था, “आपके पिता कहां हैं?” इस बयान को लेकर डीएमके ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

डीएमके के वरिष्ठ नेता और विधायक के.एन. नेहरू ने एक जनसभा में प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “उन्होंने हमारे नेता से पूछा कि उनके पिता कहां हैं। वह आएंगे, बहुत जल्द आएंगे। अभी हम इतना ही कह सकते हैं। वह लौटेंगे और फिर जिम्मेदारी संभालेंगे। कल तक हमारे कार्यकर्ता शांत थे, लेकिन इस बयान के बाद पूरे तमिलनाडु में कार्यकर्ता उनकी वापसी की मांग कर रहे हैं।”

विजय की टिप्पणी की आलोचना केवल विपक्ष ने ही नहीं, बल्कि उनके सहयोगी दलों ने भी की। वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने कहा कि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।

इस बीच, इसी महीने डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन को एक मशहूर अभिनेत्री को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में गिरफ्तार किया गया था, हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। विजय की पार्टी टीवीके ने उस टिप्पणी को महिलाओं के प्रति अपमानजनक बताया था।

हालांकि उदयनिधि स्टालिन ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उनके भाषण को काट-छांटकर गलत तरीके से पेश किया गया। रिहाई के बाद उन्होंने कहा था कि मेरे भाषण को एडिट कर यह दिखाने की कोशिश की गई कि मैंने अनुचित बातें कही हैं। कुछ लोगों ने मुझ पर दोहरे अर्थ वाले शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाया, जबकि मेरा आशय सिर्फ इतना था कि किसानों को पानी मिलना चाहिए। महिलाओं का अपमान करने का मेरा कोई इरादा नहीं था। तमिलनाडु की हर मां और बहन को मैं अपने परिवार का हिस्सा मानता हूं।

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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