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प्रोफेसर की विचित्र इच्‍छा, चांद पर भेजना चाहते हैं अपना DNA, कहा-इससे एल‍ियन मेरे जैसा इंसान बनाएंगे

चांद तक जाने की ख्‍वाहिश बहुत सारे लोगों की होगी. लेकिन एक अमेरिकी प्रोफेसर की अलग की इच्‍छा है. वे चांद पर अपना DNA भेजना चाहते हैं. चाहते हैं कि वहां मौजूद एल‍ियन के पास यह डीएनए पहुंच जाए ताकि वे उनकी तरह इंसान पैदा कर सकें. अगर इंसान पैदा न कर पाएं तो कम से कम उनकी तरह क्‍लोन तो तैयार कर ही लें. टेक्‍सास की एक स्‍पेस कंपनी सेलेस्टिस उनका डीएनए लेकर चांद पर जाएगी. बता दें कि ये कंपनी 1994 से लोगों के अवशेष चांद पर पहुंचाने में जुटी हुई है.

अमेरिका के कंसास राज्‍य के रहने वाले रिटायर्ड फ‍िजिक्‍स प्रोफेसर केनेथ ओह्म अपनी मौत के बाद डीएनए को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भेजने की योजना बना रहे हैं. 86 वर्षीय प्रोफेसर ने कहा, हम चाहते हैं कि इसे भेजा जाए ताकि किसी न किसी दिन एल‍ियन क्‍लोनिंग कर सकें और ये जान सकें कि वे अकेले नहीं हैं. न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स से बातचीत में प्रोफेसर ने कहा, मेरा मानना है कि हजारों साल बाद भी अगर एल‍ियंस को चांद पर मेरा सैंपल मिल गया तो शायद वे इसे रिक्रिएट कर लें. अगर ऐसा हुआ तो यह दुनिया के लिए एक वरदान की तरह होगा. तब मेरे क्‍लोन को एक जू में रखा जाएगा ताकि सिविलाइजेशन के बारे में बताया जा सके. आने वाली पीढ़ियां देखकर कहेंगी कि ओल्ड केन का डीएनए वहां है. यह प्रेरणा का स्रोत बनेगा.केनेथ अवशेष भेजने वाले अकेले शख्‍स नहीं
सिर्फ केनेथ नहीं, कई और लोग भी अपने अवशेष चांद पर भेजना चाहते हैं. इनमें एक टीचर, एक ग्राफ‍िक्‍स डिजाइन, एक फार्मासिस्‍ट, एक स्‍पेस एजुकेटर, एक बटाल‍ियन चीफ और एक एयरोस्‍पेस इंजीनियर शामिल हैं. इससे पहले स्टार ट्रेक फिल्म बनाने वाले जीन रौडेनबेरी और मशहूर फिजिसिस्ट जेरार्ड ओ नील अपने अवशेष भेज चुके हैं. टेक्‍सास की कंपनी सेलेस्टिस इन्‍हें लेकर जाएगी. कंपनी अब तक 17 उड़ानें भेज चुकी है. केनेथ ने कहा, मैं इस बात को सोचकर खुश हूं कि शायद मेरे एक हजार क्‍लोन बनेंगे, या शायद एक लाख या इससे ज्‍यादा भी. केनेथ ने 50 वर्षों तक पढ़ाया और चंद्रमा और मध्यपश्चिमी जीवन के बारे में कई किताबें लिखीं हैंजाने का खर्च लगभग 13,000 डॉलर
सेलेस्टिस काफी कम खर्च में चंद्रमा तो अवशेष भेजने की क्षमता रखती है. चांद की सतह तक जाने का खर्च लगभग 13,000 डॉलर यानी 10.83 लाख रुपये है. कंपनी की अगली उड़ान क्रिसमस की पूर्व संध्या पर केप कैनावेरल से होगी. इस बार तमाम अवशेषों और डीएनए लेकर जा रही उड़ान चंद्रमा के उत्तरपूर्वी छोर पर उतरेगी. वैसे तो चांद पर DNA का क्‍लोन होने की बात फ‍िल्‍मों जैसी लगती है, लेकिन अगर ये वहां बचे रह गए तो भव‍िष्‍य में काफी कुछ पता लगाया जा सकता है.

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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