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हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर राष्ट्रीय सम्मेलन

छात्रों ने की जोरदार बहस, कलश यादव को प्रथम पुरस्कार

दुर्ग, 14 अप्रैल 2026 हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 के क्रियान्वयन और महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। कार्यक्रम 13 अप्रैल 2026 को रूंगटा डेंटल कॉलेज के सभागार में संपन्न हुआ। विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र द्वारा आयोजित इस सेमिनार में छात्र-छात्राओं ने विधायी संस्थाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व, सामाजिक बाधाओं और विकसित भारत@2047 में नारी भूमिका पर गहन चर्चा की।

समारोह का उद्घाटन डॉ. लवली शर्मा, कुलपति इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ एवं छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा श्रीमती किरणमयी नायक तथा विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. लवली शर्मा ने कहा, “नारी को सशक्त बनना होगा, सोच बदलनी होगी। आजादी के 75 वर्ष बाद भी महिलाएं राजनीतिक निर्णय-निर्माण में अपेक्षित स्थान से वंचित हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 एक ऐतिहासिक कानून है, जो महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में एक-तिहाई प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगा।”
मुख्य वक्ता श्रीमती किरणमयी नायक ने अधिनियम के विभिन्न आयामों पर विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कानून के लागू होने से पहले जनगणना एवं परिसीमन की प्रक्रिया पूर्ण करना संवैधानिक अनिवार्यता है। यह कानून दशकों के महिला आंदोलनों और संघर्षों का प्रतिफल है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी ने कहा कि यह संगोष्ठी मात्र शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत के संवैधानिक लोकतंत्र में महिलाओं की सार्थक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने युवाओं से संवैधानिक जागरूकता और लैंगिक समानता के प्रति संवेदनशील बनने का आह्वान किया।


तकनीकी सत्र में छात्रों की सक्रिय भागीदारी
उद्घाटन सत्र के बाद तकनीकी सत्र में विश्वविद्यालय की भूतपूर्व कुलपति प्रो. अरुण पल्टा, सामाजिक कार्यकर्ता शताब्दी पाण्डेय और प्रख्यात अधिवक्ता विभा सिंह ने मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत किए।
छात्र-छात्राओं ने विषयों पर जोरदार बहस की। चर्चा के प्रमुख बिंदु थे-
• नीति निर्माण में महिलाओं के अल्प प्रतिनिधित्व की सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएं
• संरचनात्मक एवं संस्थागत अवरोध
• राजनीति और नौकरशाही में महिलाओं की चुनौतियां व अवसर
• 2047 तक विकसित भारत में महिलाओं की पथ-प्रदर्शक भूमिका
बहस में हर्षजीत कौर गिल, आकांक्षा बाघमारिया, श्रेया सिंह, याग्नि देवांगन, राशि चंद्राकर, पल्लवी ठाकुर, कलश यादव, मोनिका चंदनानी, अनुष्का राजभर समेत दर्जनों छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पुरस्कार वितरण सर्वश्रेष्ठ वक्ताओं को पुरस्कृत किया गया।
• प्रथम स्थान : कलश यादव
• द्वितीय स्थान : मोनिका चंदनानी
• तृतीय स्थान (संयुक्त) : पल्लवी ठाकुर एवं याग्नि देवांगन
विजेताओं को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
समापन सत्र
समापन सत्र में डॉ. हंसा शुक्ला ने वैदिक काल से नारी शक्ति पूजा, स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भूमिका और छत्तीसगढ़ की प्रमुख नारी व्यक्तित्वों पर प्रकाश डाला। डॉ. सुचित्रा शर्मा ने पितृसत्तात्मक व्यवस्था को बदलने और प्रत्येक नारी द्वारा SWOT विश्लेषण करने पर जोर दिया। उन्होंने आकर्षण के नियम का उल्लेख करते हुए सकारात्मक सोच को आवश्यक बताया।
इस सत्र की मुख्य अतिथि डॉ. रमा देवी पाणी ने अधिनियम की गहन बातें और समाज में प्रचलित रूढ़ियों पर चर्चा की।
यह सेमिनार UGC एवं शिक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित किया गया, जिसमें उच्च शिक्षा संस्थानों में लैंगिक समानता और संवैधानिक जागरूकता को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।

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