मनोरंजन

कविता प्रस्तुत है मानसिक तकलीफ के दौर में कुछ पल की शांति का प्रयास

लाकडाउन के माहौल में थोड़ा मन भावक कविता आपके लिए प्रस्तुत है
नाम श्री स्वपन बोस

कविता का सार “सड़क”

सड़क पर है जिंदगी ,पर हम घर बनाते हैं ।

घर तो बना लेते हैं पर घर पर नहीं रह पाते हैं ।

किस्मत जब खेल खेलती है ,हमसे फिर सड़क पर हम आ जाते हैं ।

सड़क मीलाती है जिंदगी
से नये यात्रा पर ले जाती है ।

जिंदगी तो वे वफ़ा है ,कभी हंसाती कभी रुलाती है ।

सड़क पर चलते चलते
ख्याल यह आती है ।

मीली थी जिंदगी चार दिन की
यु ही इसे गंवा दिया ,सड़क पर
ही चलता रहा ।

सड़क तो तैयार थी मंजिल तक पहुंचने को ,
पर मेरी जिंदगी सड़क पर ही खोता रहा ।

भटकता रहा जीवन भर
सच्चे प्यार के लिए तरसता रहा ।

प्रकाशक
स्वपन बोस
पिता स्व संतोष बोस
माता श्रीमती छायाबती बोस
पता जुगानी केम्प
जिला कोण्डागांव
छत्तीसगढ़
मो ९३४०४३३४८१

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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