छत्तीसगढ़

HF गायें पालकर चंपारण के राजीव रंजन कमाते हैं सालाना 10 लाख, इंजीनियरिंग छोड़ शुरू किया था पशुपालन

पशुपालन बिहार में जीविका का एक प्रमुख आधार बन गया है, और इस क्षेत्र में कई सफलता की कहानियां सामने आ रही हैं. यहां कई ऐसे किसान हैं जो न केवल यह काम करते हैं बल्कि इससे मोटी आमदनी भी करते हैं और जिन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ किया है. ऐसी ही एक कहानी पूर्वी चम्पारण के हरसिद्धि प्रखंड अंतर्गत बैरिया डीह गांव के राजीव रंजन की है, जिन्होंने इंजीनियरिंग छोड़कर पशुपालन को अपनाया और इसमें सफलता हासिल की.

राजीव रंजन का पशुपालन का सफर
राजीव रंजन ने बताया कि उन्होंने चेन्नई में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी, लेकिन शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी उन्हें पसंद नहीं आई. उन्हें गांव का प्राकृतिक जीवन हमेशा से प्रिय था. गया में दो साल नौकरी करने के बाद, उन्होंने गांव लौटने का फैसला किया. उन्होंने देखा कि उनके गांव में मिल्क कलेक्शन सेंटर की कोई कमी नहीं है, जिससे उन्हें पशुपालन का क्षेत्र सुविधाजनक लगा.

एक गाय से 15 गायों तक का सफर
राजीव रंजन ने महज एक गाय से अपने पशुपालन व्यवसाय की शुरुआत की थी. आज उनके पास कुल 15 एचएफ (HF) गायें हैं. वे बताते हैं कि एक एचएफ गाय हर दिन 25 से 30 लीटर दूध देती है, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी होती है. पिछले चार सालों से वे सालाना लगभग 10 लाख रुपये तक कमा रहे हैं. इन गायों को पालना फायदे का सौदा है. बस कुछ छोटी बातों का ध्यान रखना चाहिए.एचएफ गायों की देखभाल और सलाह
राजीव रंजन ने एचएफ गायों की देखभाल के बारे में भी जानकारी दी. उनका कहना है कि एचएफ गायें ठंडे प्रदेशों की होती हैं, इसलिए गर्मी के मौसम में इनकी विशेष देखभाल करनी पड़ती है. गौशाला में पंखे या कूलर लगवाना इनके लिए जरूरी है. उन्होंने नए पशुपालकों को सलाह दी कि गौशाला का व्यवसाय शुरू करने से पहले प्रशिक्षण लेना काफी फायदेमंद होता है.

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

Related Articles

Back to top button