जिले के हजारों ग्रामीण पानी के लिए कुओं, चापाकलों या दूर-दराज के अन्य जलस्रोतों पर निर्भर

जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाए गए 1500 से अधिक जलमीनारों में से लगभग 25 प्रतिशत वर्तमान में बेकार पड़े हैं। इन जलमीनारों के बंद होने का सबसे बड़ा कारण सोलर प्लेट की चोरी, मोटर की खराबी, पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होना तथा समय पर मरम्मत नहीं होना बताया जा रहा है। इससे हजारों ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है।ग्रामीणों के अनुसार कई पंचायतों में जलमीनार वर्षों से बंद पड़े हैं। कहीं सोलर प्लेट चोरी हो गई है तो कहीं मोटर जल चुकी है। कई स्थानों पर पाइपलाइन टूटने के कारण पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। भीषण गर्मी और बारिश के मौसम में भी लोगों को पानी के लिए चापाकल, कुएं अथवा दूर-दराज के जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार जिले में जल जीवन मिशन एवं अन्य योजनाओं के तहत बड़ी संख्या में सोलर आधारित जलमीनार स्थापित किए गए थे, ताकि प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सके। लेकिन रखरखाव की कमी और सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में सोलर प्लेट चोरी हो चुकी हैं।
कई जलमीनार तकनीकी खराबी के कारण महीनों से बंद पड़े हैं, जबकि उनकी मरम्मत की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है।ग्रामीणों का कहना है कि जलमीनार बनने से शुरुआत में लोगों को काफी राहत मिली थी, लेकिन अब अधिकांश स्थानों पर यह केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। कई बार संबंधित विभाग को शिकायत देने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से बंद पड़े जलमीनारों की शीघ्र मरम्मत, सोलर प्लेटों की सुरक्षा तथा नियमित रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि लोगों को निर्बाध पेयजल उपलब्ध हो सके। ^बंद जलमीनारों का सर्वे कराया जा रहा है। जिन स्थानों पर सोलर प्लेट चोरी हुई है, वहां प्राथमिकी दर्ज कराने के साथ पुनर्स्थापना की प्रक्रिया शुरू की गई है । तकनीकी खराबी वाले जलमीनारों की मरम्मत कर चालू किया जा रहा है।^ -फैसल अंसारी , सहायक अभियंता,पेयजल एवं स्वच्छता विभाग । योजना का उद्देश्य प्रभावित: ये सोलर आधारित जलमीनार ‘जल जीवन मिशन’ एवं अन्य सरकारी योजनाओं के तहत हर घर तक शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए लगाए गए थे, लेकिन सुरक्षा और देखरेख की कमी से यह प्रयास प्रभावित हो रहा है। स्थायी समाधान की मांग: ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे ये जलमीनार अब सिर्फ ‘शोपीस’ बनकर रह गए हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से इनकी जल्द मरम्मत और सोलर प्लेटों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। जलमीनारों की स्थिति: चतरा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल के लिए लगाए गए 1500 से अधिक जलमीनारों में से लगभग 25% (करीब 375 जलमीनार) वर्तमान में खराब या बेकार पड़े हैं।


