सैयद अता हसनैन कौन हैं, इंडियन आर्मी से है नाता, होंगे बिहार के अगले राज्यपाल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार रात को कई प्रदेशों के राज्यपालों की नियुक्तियां कीं, जिसके तहत लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया। हसनैन, आरिफ मोहम्मद खान की जगह लेंगे, जिन्होंने 2 जनवरी, 2025 को बिहार के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी।
हसनैन भारतीय सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी, सैन्य रणनीतिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ हैं। वे कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान अपनी रणनीति और नेतृत्व के लिए खास तौर पर जाने जाते हैं। वे भारतीय सेना की प्रतिष्ठित राजपुताना राइफल्स रेजिमेंट से जुड़े रहे।
अलग-अलग संवेदनशील क्षेत्रों में सेवा दी
उन्होंने इंडियन मिलिट्री अकादमी, देहरादून से सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया और लंबे समय तक अलग-अलग संवेदनशील क्षेत्रों में सेवा दी। अपने करियर के दौरान उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया और आखिरकार लेफ्टिनेंट जनरल के पद तक पहुंचे। उनके सैन्य करियर का सबसे महत्वपूर्ण चरण तब रहा जब वे चिनार कोर (15 कोर) के कमांडर बने।
यह कोर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों और नियंत्रण रेखा (LoC) की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। अपने कार्यकाल में उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ बेहतर संवाद और सहयोग बढ़ाने की नीति को बढ़ावा दिया, जिसे “हार्ट्स एंड माइंड्स” रणनीति कहा जाता है। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी हसनैन राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में सक्रिय रहे।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर काम किया
उन्हें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का सदस्य नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने आपदा प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर काम किया। इसके अलावा वे रक्षा और सुरक्षा मामलों पर टीवी डिबेट, लेख और व्याख्यानों के माध्यम से अपनी विशेषज्ञ राय देते रहते हैं। आज सैयद अता हसनैन को भारत में कश्मीर, आतंकवाद विरोधी रणनीति और सैन्य मामलों के प्रमुख विशेषज्ञों में गिना जाता है।
हसनैन का जन्म एक सैन्य परिवार में हुआ था। उन्होंने नैनीताल के प्रसिद्ध शेरवुड कॉलेज से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। वहीं, दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक किया। इसके अलावा उन्होंने किंग्स कॉलेज लंदन, रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज (लंदन) और एशिया पैसिफिक सेंटर फॉर सिक्योरिटी स्टडीज (हवाई) से भी शिक्षा प्राप्त की है।
अहम सैन्य अभियानों में भूमिका निभाई
साल 1974 में भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) से स्नातक होने के बाद, इन्हें गढ़वाल राइफल्स की चौथी बटालियन में नियुक्त किया गया। नियुक्ती के बाद उन्होंने जम्मू कश्मीर में कई अहम सैन्य अभियानों में भूमिका निभाई। साथ ही श्रीलंका, सियाचिन ग्लेशियर, उत्तर-पूर्व भारत और जम्मू-कश्मीर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने मोजाम्बिक और रवांडा में संयुक्त राष्ट्र (UN) के अभियानों में भी हिस्सा लिया।
सेवानिवृत्ति से पहले उन्हें भारतीय सेना के मिलिट्री सेक्रेटरी के रूप में तैनात किया गया। जुलाई 2013 में सेवानिवृत्त होने के बाद, वे जम्मू-कश्मीर, पाकिस्तान, पश्चिम एशिया और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर नियमित रूप से लिखते और व्याख्यान देते रहे।वे साल 2015 में हसनैन प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय की कार्यकारी परिषद के सदस्य मनोनीत हुए। वहीं, साल 2018 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा उन्हें कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय का चांसलर नियुक्त किया गया। वे वर्तमान में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। हालांकि, अब वो बिहार के राज्यपाल की कुर्सी संभालेंगे।दिल्ली में सत्ता परिवर्तन के एक साल के बाद अब दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना का तबादला कर दिया गया है। दिल्ली के नए उपराज्यपाल के रूप में 1988 बैच के भारतीय विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी तरणजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। संधू अमेरिका में भारत के 28वें राजदूत के रूप में भी कार्यरत रह चुके हैं




