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गाय की सींग है ‘प्राकृतिक एंटीना’, इसके दूध में होता प्रकृति का चमत्कार, जानें एक्सपर्ट से

सीतामढ़ी:  भारतीय पारंपरिक कृषि और पशुपालन में सींग वाली गायों को हमेशा से विशेष स्थान दिया गया है. हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि गाय की सींग महज एक शारीरिक रक्षा प्रणाली नहीं हैं. बल्कि यह प्रकृति की एक अद्भुत संरचना हैं. साक्षात्कारकर्ता के अनुसार, जिस तरह रेडियो या टीवी को सिग्नल पकड़ने के लिए एंटीना की आवश्यकता होती है. ठीक उसी तरह गाय के सींग भी एक ‘प्राकृतिक एंटीना’ के रूप में कार्य करती है. यह माना जाता है कि प्रकृति ने इन सींगों को विशिष्ट उद्देश्य से बनाया है, जो केवल उन्हीं मवेशियों में पाए जाते हैं. जो प्राकृतिक रूप से विकसित हुए हैं.

जानें सींग वाली गायों का महत्व

पशुपालक कौशल यादव बताते हैं कि वैज्ञानिक और पारंपरिक शोधकर्ताओं का एक वर्ग यह तर्क देता है कि गाय की सींग ब्रह्मांड और वातावरण में मौजूद सूक्ष्म तत्वों और सकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करने में सक्षम है. वहीं, प्रशिक्षण और वैज्ञानिक अध्ययनों के हवाले से यह बताया गया है कि सींगों के माध्यम से गाय सौर ऊर्जा और अन्य प्राकृतिक तरंगों को ग्रहण करती है. यह प्रक्रिया न केवल उन्हीं मवेशियों में संभव है, जिनके पास सींग होती है. बिना सींग वाले या कृत्रिम रूप से विकसित मवेशी इन विशिष्ट प्राकृतिक तत्वों को उस दक्षता से ग्रहण नहीं कर पाते हैं, जिससे उनके दूध की गुणवत्ता में वह सूक्ष्म अंतर आ जाता है. जो सींग वाली गाय को विशेष बनाता है.

सींग वाली गाय का दूध होता है बहुत ही लाभदायक

उन्होंने बताया कि जब गाय इन प्राकृतिक ऊर्जाओं को अवशोषित करती है तो इसका सीधा प्रभाव उसके शारीरिक चयापचय और दूध उत्पादन पर पड़ता है. साक्षात्कार में यह स्पष्ट किया गया है कि सींग वाली गाय से प्राप्त दूध अन्य मवेशियों की तुलना में अधिक अद्वितीय और लाभकारी होती है. इस दूध में पाए जाने वाले पोषक तत्व न केवल शारीरिक शक्ति प्रदान करते हैं. बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी श्रेष्ठ माने जाते हैं. सींगों द्वारा ग्रहण की गई सकारात्मक ऊर्जा दूध के माध्यम से मानव शरीर में पहुंचती है, जिससे इसे एक ‘औषधीय अमृत’ के रूप में देखा जाता है. यही कारण है कि आयुर्वेद और प्राचीन ग्रंथों में भी सींग वाली देशी गाय के दूध की महिमा का गुणगान किया गया हैउन्होंने बताया कि आधुनिक विज्ञान अभी भी सींगों के इस ‘एंटीना प्रभाव’ पर शोध कर रहा है, लेकिन पशु व्यवहार विशेषज्ञों का मानना है कि सींग गाय के शरीर के तापमान को नियंत्रित करने और उसकी संवेदी क्षमताओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. साक्षात्कार देने वाले व्यक्ति ने साझा किया कि यह ज्ञान उन्हें विशेष प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त हुआ, जो इस बात की पुष्टि करता है कि प्रकृति की हर संरचना के पीछे एक गहरा विज्ञान छिपा है. ऐसे में सींग वाली गाय का पालन केवल परंपरा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने का एक माध्यम है. इसके दूध का सेवन हमें उन दुर्लभ प्राकृतिक तत्वों से जोड़ता है. जो आधुनिक डेयरी फार्मिंग की दौड़ में कहीं खोते जा रहे हैं.

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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