बिलासपुर जेल में इंसानियत की मिसाल: बंदियों के साथ बंधवा रोजा इफ्तार, 20 साल से जारी नेक पहल

बिलासपुर, 5 मार्च 2026 — छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सटे बिलासपुर में इंसानियत और भाईचारे की एक अनोखी मिसाल सामने आई है। छत्तीसगढ़ मुस्लिम विकास संघ ने आदर्श केन्द्रीय जेल (या जिला जेल) में बंधवा रोजा (कजा रोजा) के अवसर पर बंदियों के बीच विशेष रोजा इफ्तार कार्यक्रम का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम में संघ के पदाधिकारी और समाजसेवी बंदियों के साथ बैठकर रोजा खोला और उन्हें जीवन में अच्छाई, सब्र तथा नेक रास्ते पर चलने का संदेश दिया। कई बंदी खुद भी बंधवा रोजा रखते हैं, इसलिए उनके हौसले बढ़ाने और उन्हें अकेला महसूस न होने देने के लिए बाहर से सदस्य पहुंचे और उनके साथ इफ्तार किया।

संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि यह नेक पहल पिछले लगभग 20 वर्षों से लगातार जारी है। हर साल रमजान और बंधवा रोजा के मौके पर जेल पहुंचकर बंद भाइयों के साथ इफ्तार कराया जाता है तथा इंसानियत, सब्र और भाईचारे का पैगाम दिया जाता है।
समाजसेवियों ने कहा, “जो बंदी यहां अपनी सजा काट रहे हैं, वे जब बाहर निकलें तो एक जिम्मेदार और अच्छे इंसान बनकर समाज में नई शुरुआत करें।” बंधवा रोजा वह रोजा है जो रमजान में बीमारी, सफर या अन्य मजबूरी के कारण न रख पाने पर बाद में अल्लाह की रजा के लिए रखा जाता है। यह सब्र, अनुशासन और दूसरों के प्रति हमदर्दी सिखाता है।
ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाते हैं और दिखाते हैं कि दीवारों के पार भी मानवता और भाईचारा जीवित रह सकता है। छत्तीसगढ़ मुस्लिम विकास संघ की यह पहल न केवल धार्मिक संवेदनशीलता का प्रतीक है, बल्कि कैदियों के सुधार और मुख्यधारा में वापसी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।



