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ईरान जंग के कारण भारत में बढ़ सकती हैं कंडोम की क़ीमतें, जानकारों ने क्यों जताई चिंता

कंडोम के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले पेट्रो-केमिकल प्रोडक्ट, अमोनिया और सिलिकॉन ऑयल की सप्लाई में आई रुकावट के कारण अब इनकी क़ीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. इसका असर रीटेल सेल्स पर भी देखने को मिल सकता है.

इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक़, भारत के 8000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की इस इंडस्ट्री के सप्लायर्स की ओर से ऐसे पर्याप्त संकेत मिल रहे हैं कि अमोनिया की कीमतों में 40-50 फ़ीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जिसकी वजह से सिलिकॉन ऑयल की कीमतें भी बढ़ सकती हैं.

इंडस्ट्री से जुड़े एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बीबीसी हिन्दी से कहा, “किसी ने नहीं सोचा था कि इस इंडस्ट्री में कोई दिक्कत आएगी, क्योंकि कंडोम अब एक लाइफ़ स्टाइल प्रोडक्ट बन चुका है और इसके ट्रेड का लोगों पर असर पड़ता है.”

लेकिन कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और उसकी वजह से रीटेल सेल्स पर इसका असर ही इस कड़ी का एकमात्र चिंताजनक पहलू नहीं है.

इंडस्ट्री में आई इस दिक्कत का असर उन लोगों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है जो जनसंख्या और हेल्थ स्टडीज (जैसे परिवार नियोजन कार्यक्रम और एड्स नियंत्रण कार्यक्रम) से जुड़े हैंबेहतर हेल्थ रिजल्ट हासिल करने के लिए गर्भनिरोधक तक पहुंच को मजबूत करना और गर्भनिरोध में पुरुषों की जिम्मेदारी को सामान्य बनाना बेहद ज़रूरी है. इसलिए, कंडोम की कमी या कीमतों में बढ़ोतरी से टीनएज प्रेग्नेंसी के मामलों में भी वृद्धि हो सकती है.”

एचएलएल लाइफ़ केयर लिमिटेड के प्रवक्ता ने बीबीसी हिन्दी को बताया, “पीवीसी फ़ॉइल, एल्युमिनियम फ़ॉइल, पॉली केमिकल्स और पैकेजिंग मटेरियल जैसे मुख्य इनपुट की सप्लाई में रुकावट और कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स में बाधा के कारण प्रोडक्शन और ऑर्डर पूरा करने का काम प्रभावित हो सकता है.”

एचएलएल का हेडक्वार्टर केरल के तिरुवनंतपुरम में है. यह एक 60 साल पुरानी पब्लिक सेक्टर की बड़ी कंपनी है. इसे केंद्र सरकार ने देश के परिवार नियोजन कार्यक्रम को सहयोग देने के उद्देश्य से स्थापित किया था.

केरल में प्रचुर रबर बागानों की वजह से ये यहां स्थापित की गई थी. बीते कुछ सालों में एचएलएल का विस्तार सात अलग-अलग जगहों तक हो गया है.

अब यह कंडोम, हॉस्पिटल में इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट और दवाइयां बनाती है. इनका मुख्य उद्देश्य देश में महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है.

पब्लिक सेक्टर की यह कंपनी अब हर साल करीब दो अरब कंडोम बनाती है. यह देश में बनने वाले कुल कंडोम का लगभग 50 फ़ीसदी है.

2025-26 के दौरान, एचएलएल ने परिवार नियोजन कार्यक्रम और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के लिए 100 करोड़ रुपये से ज़्यादा कीमत के मेल कंडोम मुफ़्त में उपलब्ध कराए.

ये अपने प्रोडक्ट्स को 87 देशों में निर्यात करती है.

इंडस्ट्री में तनाव की मुख्य वजह युद्ध के कारण पैदा हुई डिस्ट्रिब्यूशन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याएं हैं.

एक अधिकारी ने कहा, “ग्लोबल शिपिंग कंटेनरों की कमी के कारण विदेश में ग्राहकों तक सामान भेजने में देरी हो रही है. समुद्री माल ढुलाई में लगने वाला समय बढ़ गया है, क्योंकि होर्मुज़ स्ट्रेट से बड़े जहाज़ों की आवाजाही रोक दी गई है.

‘केप ऑफ़ गुड होप’ के रास्ते से जहाज़ों को भेजने में 15-20 दिन ज़्यादा लग रहे हैं. मध्य-पूर्व में हवाई क्षेत्र पर लगी पाबंदियों के कारण हवाई माल ढुलाई की क्षमता कम हो गई है, जिसकी वजह से तैयार माल के कंसाइनमेंट का ढेर जमा हो रहा है.”

इंडस्ट्री के सूत्रों का कहना है, “फ़िलहाल कच्चे माल की सप्लाई में आई कमी का ठीक-ठीक अंदाज़ा लगाना मुश्किल है. अनिश्चितता बनी हुई है. एक तो इनपुट मटीरियल की बात है. इनपुट की लागत, फिर प्रोडक्ट की लागत और उसके बाद डिस्ट्रिब्यूशन में आई रुकावट. ज़ाहिर है कि सप्लाई पर इसका असर पड़ेगा ही.”

दरअसल, महाराष्ट्र के मालेगांव में स्थित क्यूपिड लिमिटेड को भी इसका ख़मियाजा भुगतना पड़ रहा है.

क्यूपिड लिमिटेड के सीनियर जनरल मैनेजर आर. बाबू ने बीबीसी हिन्दी को बताया, “सिलिकॉन ऑयल और एल्युमिनियम फॉइल की कीमतें काबू में नहीं हैं. आम तौर पर इस दौरान लेटेक्स की कीमतें भी बढ़ जाती हैं. इसलिए, इसका असर मैन्युफैक्चरिंग की लागत पर पड़ रहा है. दिक्कत यह है कि हम बढ़ी हुई कीमतें वेंडर्स पर नहीं डाल सकते, क्योंकि वे इसके लिए तैयार नहीं हैं. इसलिए यह एक बड़ी समस्या है.”

आर. बाबू ने कहा, “हम अपने कुल प्रोडक्शन का 80 फ़ीसदी हिस्सा मुख्य रूप से रूस, दक्षिण अफ़्रीका, यूरोप और ब्राज़ील को एक्सपोर्ट करते हैं. इन जगहों तक सामान पहुंचाने के लिए शिपिंग वेसल्स मिलने में भी हमें दिक्कत हो रही है.”

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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