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IAS बनी पर मां नहीं देख पाई, हादसे के दर्द से UPSC टॉपर तक, हिम्मत भर देगी यह कहानी

मां चाहती थी कि बेटी कुछ अलग करे। समाज सेवा कर आगे बढ़े। एक सपना…जो पूरा तो हुआ लेकिन देर चुकी थी। हादसे ने वो खुशी छीन ली जो बेटी अपनी मां के चेहरे पर देखना चाहती थी। आंसू लेकर आगे बढ़ना आसान नहीं था लेकिन जो सपना संजोया था, उसे पूरा ही करना था। कठिनाइयों और संघर्ष के बीच UPSC की तैयारी की। पहले प्रयास में असफलता मिली लेकिन दूसरे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक-14 हासिल कर टाॅपर बनीं। यह कहानी है अंकिता चौधरी (Ankita Chaudhary) की, जिन पर दुखों का पहाड़ टूटा लेकिन कदम नहीं डिगे। आइए विस्तार से समझते हैं अंकिता सक्सेस स्टोरी, जो हर उस इंसान को सपने पूरे करने की प्रेरणा देती है जो कठिनाइयों से आगे बढ़ते हैं।एक इंटरव्यू के मुताबिक, अंकिता चौधरी हरियाणा की रहने वाली हैं। उनकी शुरुआत की पढ़ाई रोहतक के इंडस पब्लिक स्कूल से हुई। वह स्कूल के दिनों से ही मन लगाकर पढ़ाई करती थीं। यही वजह थी कि वह अच्छे नंबर लाने वाली स्टूडेंट रहीं। बाद में आगे की स्टडी के लिए वह दिल्ली चली आईं।अंकिता ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रसिद्ध हिंदू काॅलेज में ग्रेजुएशन में एडमिशन लिया। यहां से उन्होंने BSc की डिग्री हासिल की। इसके बाद वह इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलाॅजी (IIT) दिल्ली पहुंचीं और MSc की पढ़ाई शुरू कर दी। इस दौरान ही उन्होंने UPSC की तैयारी करने का फैसला किया।अंकिता के पिता शुगर मिल में काम करते हैं। उनकी मां टीचर थीं और हमेशा चाहती थीं कि बेटी कुछ अलग करे। समाज की सेवा करते हुए आगे बढ़े। हालांकि किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। एक हादसे में अंकिता की मां चल बसीं। उनके जाने के बाद अंकिता की जिंदगी पूरी तरह बदल गई।

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2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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