सेवा एक नई पहल संयोजक सतराम जेठमलानी: हमारे बुजुर्ग : अगर न – सात सुहागिन मिल कर इस चक्की को न घुमाए – तो हम सिंधी (हिन्दू) समाज वालो की शादी संपन्न नहीं होती – तात्पर्य यह है कि हमारे विवाह रस्म में – यह रस्म सबसे जरूरी है।

सेवा एक नई पहल संयोजक सतराम जेठमलानी: हमारे बुजुर्ग : अगर न – सात सुहागिन मिल कर इस चक्की को न घुमाए – तो हम सिंधी (हिन्दू) समाज वालो की शादी संपन्न नहीं होती – तात्पर्य यह है कि हमारे विवाह रस्म में – यह रस्म सबसे जरूरी है।
छत्तीसगढ़ बिलासपुर भूपेंद्र साहू की रिपोर्ट। अनाज पीसने की पुरातन मशीन (चक्की) इसमें एक गोल पत्थर नीचे स्थिर व दूसरा पत्थर ऊपर घूमता हुआ – जिस पर लकड़ी का हैंडल लगा रहता है – इसे सिंधी भाषा में जन्ड्र कहते है –
आजादी की कीमत चुकाती – विभाजन की बेला आ ही गई – अपने धर्म की रक्षा के लिए सब कुछ छोड़ कर निकलना – हां सब कुछ – निशब्द –
एक सिंधी अमां – जूट के मजबूत झोले में बड़े जतन से – कुछ रखे – धीमे धीमे जा रही थी – अपनी मातृ भूमि सिंध को छोड़ – अंजानी यात्रा पर – साथ चल रहे लोगों ने समझाया – अमां इतना वजन क्यों उठाए हो – हम सब खाली हाथ चल रहे है – जहां हम खाएंगे वहां आप खाएंगे – जहां जैसे हम रहेंगे वहां आप रहना – फेंक दो इस मन (40 किलो) भर वजन को – पर इस यात्रा में – माता जी का सारा
मन बस इस मन भर वजन में ही लगा रहता –
अमा के कारण यात्रा में विलम्ब होता देख – आखिर मुखी(ग्रुप लीडर) ने गुस्से में आकर उस जूट के थैले का मुंह खोल दिया – अरे ये क्या – सब आवाक रह गए – उसमे पत्थर की चक्की (जंड्र) बंधा हुआ था –
सह यात्रियों ने समझाया – मां लेे ही चलना है तो आभूषण , सोना चांदी , जमीन जायदाद की रजिस्ट्रियों लेे चलो – यह दो पत्थर ढोए ढोए करोगी क्या – ?
सबकी सवालिया नजरो को ताड़ते हुए – बड़े धैर्य से उस मां ने जो कहां वह आप भी सुनो –
मेरी
सिंधु कोख से जन्मे बच्चे – जहां भी जाएंगे – खुश रहेंगे – हीरे जवाहरात सोना जमीन जायदाद सब बना लेंगे – मुझे मेरे बच्चो के पुरुषार्थ पर पूर्ण विश्वास है पर एक अनजाना डर भी है कि इस पुरुषार्थ के चक्कर में – अपनी सिंधी संस्कृति सभ्यता बोली भाषा भूल न जाए – इसलिए मै अपनी संस्कृति के इस प्रतीक जन्ड्र को साथ ले चल रही हूं – निरूतर रह गए सब – ऐसे थे हमारे बुजुर्ग वृद्धजन,,,
आज जी सिंधी बसाहट वाले मुहल्लो , कॉलोनियों में – जिस घर में बुजुर्ग वृद्ध अमां है – उस घर में आपको सिंधी बोली भाषा संस्कृति , व्रत नेम त्यौहार के प्रतीक ऐसे जंड्र अवश्य मिलेंगे ।
01 अक्टूबर अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस पर प्रेषक : सतराम जेठमलानी
संयोजक (सेवा एक नई पहल)



