हलषष्ठी की हार्दिक शुभकामनाएं : डॉ माधवी संतोष वस्त्रकार अध्यक्ष जनपद पंचायत तखतपुर जिला बिलासपुर छत्तीसगढ़

हलषष्ठी की हार्दिक शुभकामनाएं : डॉ माधवी संतोष वस्त्रकार अध्यक्ष जनपद पंचायत तखतपुर जिला बिलासपुर छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ बिलासपुर भूपेंद्र साहू की रिपोर्ट। तखतपुर विधानसभा हलषष्ठी की हार्दिक शुभकामनाएं : डॉ माधवी संतोष वस्त्रकार अध्यक्ष जनपद पंचायत तखतपुर जिला बिलासपुर छत्तीसगढ़, कमर छठ छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा माताओं का पर्व है। इसे हलषष्ठी, हलछठ, ललही छठ भी कहते हैं।
भादो महीने के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को। जन्माष्टमी से 2 दिन पहले। इस साल 2026 में ये आज 2 सितंबर बुधवार को है।
संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि के लिए
मान्यता है कि माता देवकी ने अपने 6 पुत्रों को कंस ने मार दिया तो 7वें पुत्र बलराम की रक्षा के लिए इसी दिन व्रत रखा था। बलराम का अस्त्र हल है, इसलिए इसे हलषष्ठी कहते हैं।
माताएं सुबह से निर्जला व्रत रखती हैं। आंगन या गली में मिट्टी से 2 छोटे तालाब बनाते हैं, इसे सगरी कहते हैं।
सगरी के किनारे मिट्टी के शिव-पार्वती, बैल, गणेश बनाकर रखते हैं।
पूजा में पसहर चावल का सबसे ज्यादा महत्व है – ये वो चावल है जो बिना हल चलाए अपने आप तालाब, मेड़ पर उगता है। इसी वजह से बलराम जी के हल का सम्मान होता है। ये बाजार में 100-120 रु किलो बिकता है। साथ में 6 तरह की भाजी – चरोटा, खट्टा, चेंच, मुनगा, कुम्हड़ा, लाल भाजी, चौलाई में से कोई 6, महुआ का फूल, बेलपत्र, भैंस का दूध-दही चढ़ाते हैं। कमरछठ की कथा सुनते हैं और शाम को डूबते सूरज को अर्घ्य देकर व्रत तोड़ते हैं। व्रत में पसहर चावल का ही भात खाते हैं।
जय श्री कृष्णा राधे राधे
हलषष्ठी की हार्दिक शुभकामनाएं : डॉ माधवी संतोष वस्त्रकार अध्यक्ष जनपद पंचायत तखतपुर जिला बिलासपुर छत्तीसगढ़

