पंचर की दुकान पर काम करने वाला लड़का बना IAS, UPSC में हासिल की 32वीं

जब इरादे मजबूत हों और कुछ कर गुजरने का जुनून हो, तो गरीबी और विपरीत परिस्थितियां भी आपके रास्ते की रुकावट नहीं बन सकतीं। इस बात को साबित कर दिखाया है महाराष्ट्र के पालघर जिले के रहने वाले वरुण बरनवाल ने। एक समय जब घर चलाने के लिए पिता की मौत के बाद वरुण को साइकिल पंचर की दुकान संभालनी पड़ी थी, उसी वरुण ने अपनी मेहनत और मां के त्याग के दम पर देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा 2016 में ऑल इंडिया 32वीं रैंक हासिल कर ली।
पिता के निधन से टूटा परिवार का सहारा
वरुण के पिता एक छोटी सी साइकिल पंचर लगाने की दुकान चलाते थे, जिससे पूरे परिवार का पालन-पोषण होता था। साल 2006 में, जब 16 वर्षीय वरुण ने 10वीं की परीक्षा दी थी, उसके केवल तीन दिन बाद ही उनके पिता का लंबी बीमारी के कारण निधन हो गया। पिता के जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।10वीं का रिजल्ट आया तो वरुण ने अपनी क्लास में टॉप किया था। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने उन्हें आगे की पढ़ाई छोड़कर पिता की दुकान संभालने की सलाह दी। परिवार की जिम्मेदारी निभाने के लिए वरुण ने भी किताबें छोड़कर साइकिल रिपेयरिंग शुरू की।
मां के एक फैसले ने बदल दी जिंदगी
वरुण रोज सुबह स्कूल जाने के बजाय दुकान पर बैठकर पंचर बनाने लगे। लेकिन उनकी मां अपने होनहार बेटे का सपना इस तरह टूटते हुए नहीं देख सकती थीं। मां ने हिम्मत दिखाई और बेटे से कहा, “तुम पढ़ाई जारी रखो, दुकान मैं संभालूंगी।”
मां ने न केवल दुकान का काम अपने कंधों पर लिया, बल्कि हर दिन की कमाई में से आधा हिस्सा घर चलाने के लिए और आधा हिस्सा बच्चों की पढ़ाई के लिए बचाना शुरू किया।
शिक्षकों और दोस्तों का मिला साथ
स्कूल पूरा करने के बाद वरुण का मन डॉक्टर बनने का था, लेकिन मेडिकल कॉलेज की भारी-भरकम फीस के कारण उन्हें अपना इरादा बदलना पड़ा। इसके बाद उन्होंने पुणे के एमआईटी (MIT Pune) से इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की। पिता के दोस्त डॉ. कंपली और स्कूल के शिक्षकों ने उनकी फीस भरने में मदद की।कॉलेज की पढ़ाई के दौरान वरुण ने स्कॉलरशिप पाई और बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई जारी रखी। इंजीनियरिंग में शानदार प्रदर्शन के दम पर कॉलेज खत्म होते ही उन्हें एक मल्टी-नेशनल कंपनी (MNC) में अच्छी नौकरी मिल गई।
पहले ही प्रयास में क्रैक की UPSC परीक्षा
एमएनसी में नौकरी मिलने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति सुधर गई। लेकिन वरुण समाज के लिए कुछ बड़ा करना चाहते थे। उन्होंने नौकरी छोड़ दी और UPSC की तैयारी में जुट गए। कोचिंग फीस न होने पर उन्होंने एक संस्थान से वादा किया कि अगर वे उन्हें फ्री में पढ़ाएंगे, तो वह पहली बार में ही चयन होकर दिखाएंगे।
वरुण ने दिन-रात एक करके पढ़ाई की और 2016 में अपने पहले ही प्रयास में 32वीं ऑल इंडिया रैंक लाकर IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया। उनकी यह सफलता देश के लाखों युवाओं को सिखाती है कि परिस्थिति चाहे कैसी भी हो, हिम्मत और लगन से हर सपना पूरा किया जा सकता है।



