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पहले खेतों में नीलगाय दिखती थी… इस बार दिखा कूनो से निकला चीता! 3 दिन से बढ़ी हुई हैं गांव वालों की धड़कनें

श्योपुर के सोईकलां इलाके में इन दिनों सबसे ज्यादा अगर किसी की चर्चा है, तो वह कोई नेता नहीं, कोई फिल्म स्टार नहीं… बल्कि एक चीता है. वही चीता, जिसे कुछ साल पहले बड़े इंतजार और उम्मीदों के साथ कूनो नेशनल पार्क में बसाया गया था. अब वही चीता जंगल की सीमा पार करके गांव के खेतों तक पहुंच गया है. और पिछले तीन दिनों से ग्रामीणों की नजरें उसी पर टिकी हुई हैं.कहानी गुरुनावदा गांव की है. यहां पिछले तीन-चार दिनों से लोगों को खेतों में एक  दिखाई दे रहा है. कभी वह मेड़ों के बीच दौड़ता नजर आता है. कभी फसलों के किनारे टहलता हुआ. कभी दूर से झाड़ियों में गायब हो जाता है. जिसने भी उसे देखा, पहले तो यकीन ही नहीं हुआ. फिर मोबाइल निकला… वीडियो बना… और देखते ही देखते पूरा गांव उस वीडियो की चर्चा करने लगा.कुछ लोग उत्साहित हैं कि उन्होंने पहली बार खुले में चीता देखा. तो कुछ लोग डरे हुए हैं कि अब खेतों में अकेले कैसे जाएं? आखिर खेती भी करनी है. मवेशियों को भी चराना है. लेकिन अगर सामने अचानक चीता आ गया तो? इसी डर ने गांव में बेचैनी बढ़ा दी है. चीते की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम भी हरकत में आ गई. ट्रैकिंग टीमें लगातार उसके मूवमेंट पर नजर रख रही हैं. यह देखा जा रहा है कि वह किस दिशा में जा रहा है और कहीं किसी आबादी के ज्यादा करीब तो नहीं पहुंच रहाडीएफओ आर. थिरुकुराल का कहना है कि खुले जंगल में रहने वाले चीते स्वाभाविक रूप से बड़े इलाके में घूमते हैं. विभाग लगातार उनकी निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें भी तैनात की जाएंगी. वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अकेले खेतों में न जाएं, खासकर सुबह और शाम के समय अधिक सतर्क रहें. यदि कहीं चीता दिखाई दे, तो उसके पास जाने या उसे घेरने की कोशिश न करें और तुरंत वन विभाग को सूचना दें.

दरअसल, कूनो नेशनल पार्क में इस समय 19 चीते खुले जंगल में घूम रहे हैं, जबकि 31 चीते अभी बाड़ों में हैं. इनकी एक्टिविटी पर नजर रखी जा रही है. कभी-कभी कोई चीता अपने नेचुरल बिहेवियर की वजह से तय सीमा से बाहर निकलकर आसपास के इलाकों में भी पहुंच जाता है. लेकिन गांव वालों के लिए यह कोई सामान्य बात नहीं है. उनके लिए यह पहली बार है, जब खेत में फसल के साथ-साथ चीते की मौजूदगी का भी ध्यान रखना पड़ रहा है.

एक तरफ खेत हैं… दूसरी तरफ जंगल… और दोनों के बीच घूमता एक चीता. गुरुनावदा और आसपास के गांवों में लोगों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं. कूनो का यह मेहमान आखिर कब वापस जंगल लौटेगा? इसका जवाब किसी के पास नहीं है.  के इन गांवों में पिछले तीन दिनों से सुबह की शुरुआत अब मौसम या खेती की चर्चा से नहीं… बल्कि इस सवाल से हो रही है कि आज चीता कहां दिखा?

सबका संदेश

2004 से पत्रकारिता से जुड़े,2010 से भारत सरकार अखबार संपादक, पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष 2019,25से अब तक, 2011 से समाज के जिलाध्यक्ष अब तक

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