भारत टेक्स 2026: टेक्सटाइल निवेश से बिहार की औद्योगिक उड़ान को नई रफ्तार

भारत की टेक्सटाइल और परिधान उद्योग में बढ़ते निवेश के बीच बिहार खुद को नए औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत टेक्स 2026 में राज्य सरकार द्वारा किए गए 1,476 करोड़ रुपए के निवेश समझौते और उद्योग-अनुकूल नीतियां इस बात का संकेत हैं कि बिहार पारंपरिक हस्तशिल्प की पहचान से आगे बढ़कर आधुनिक टेक्सटाइल एवं परिधान विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनने की तैयारी कर रहा है।
16 कंपनियों के साथ 1,476 करोड़ रुपए के एमओयू
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत टेक्स 2026 के दौरान बिहार सरकार ने 16 प्रमुख टेक्सटाइल और अपैरल कंपनियों के साथ 1,476 करोड़ रुपए के एमओयू पर हस्ताक्षर किए। राज्य सरकार के मुताबिक इन निवेश प्रस्तावों से 40,500 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। इससे राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलने के साथ युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
निवेशकों के लिए आकर्षक प्रोत्साहन
‘बिहार है तैयार’ विजन के तहत राज्य सरकार निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रही है। बिहार इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (BIADA) के माध्यम से प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है, जिससे उद्योगों की स्थापना की प्रक्रिया तेज हो सके। इसके अलावा प्रति कर्मचारी प्रतिमाह 5,000 रुपए तक की वेज सब्सिडी और ईएसआई व ईपीएफ योगदान पर 300% तक सहायता जैसे प्रोत्साहन भी दिए जा रहे हैं।
बिहार पवेलियन बना आकर्षण का केंद्र
भारत टेक्स 2026 में बिहार पवेलियन निवेशकों और आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र रहा। यहां भागलपुरी सिल्क, मधुबनी पेंटिंग, टिकुली कला, सुजनी और खटवा वर्क जैसे पारंपरिक शिल्पों के साथ आधुनिक गारमेंटिंग और टेक्सटाइल विनिर्माण की संभावनाओं को भी प्रदर्शित किया गया। जीआई टैग प्राप्त उत्पादों ने विदेशी खरीदारों का ध्यान आकर्षित किया, जबकि राज्य की औद्योगिक नीतियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों में सकारात्मक संदेश दिया।
वैश्विक टेक्सटाइल हब बनने की रणनीति
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह और उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार ने बिहार को वैश्विक टेक्सटाइल एवं परिधान निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की रणनीति पर जोर दिया। उनका उद्देश्य बड़े निवेश के साथ स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देना और औद्योगिक विकास का लाभ व्यापक स्तर तक पहुंचाना है।
कौशल विकास और बुनियादी ढांचे पर रहेगा फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कौशल विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार, निवेश-अनुकूल नीतियों और पारंपरिक शिल्प के संरक्षण पर समान रूप से ध्यान दिया गया तो बिहार आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख टेक्सटाइल और परिधान विनिर्माण केंद्रों में शामिल हो सकता है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने के साथ ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती मिलेगी।
औद्योगिक विकास की नई दिशा
भारत टेक्स 2026 में मिले निवेश प्रस्ताव बिहार के लिए केवल औद्योगिक उपलब्धि नहीं, बल्कि रोजगार, निर्यात और विनिर्माण के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। यदि इन परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया, तो बिहार की टेक्सटाइल क्षमता देश के औद्योगिक मानचित्र पर नई मिसाल बन सकती है।


